खानपान और दिनचर्या में बदलाव की वजह से गुर्दे की पत्थरी के मरीजों की
संख्या बढ़ रही है। शारीरिक श्रम न होने या कम होने से यह रोग और बढ़ रहा
है। यह कहना है जेआर किसान होम्योपैथी कॉलेज और अस्पताल के डॉ. एस.के.
गुप्ता का। वे शुक्रवार को कॉलेज में हुंए चिकित्सा शिविर में बोल रहे थे।
उन्होंने
बताया कि प्रदेश में दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों का प्रयोग खूब होता
है। इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, लेकिन शारीरिक श्रम नहीं होने
से इनमें मौजूद कैल्शियम गुर्दे में पत्थरी का कारण बनने लगता है।
होम्योपैथी में पत्थरी को निकालने का जो उपचार है उससे पत्थरी दोबारा होने
की गुंजाइश न के बराबर होती है। होम्योपैथी की दवाएं पत्थरी को घोलकर बाहर
निकाल देती हैं। जेआर किसान होम्योपैथी अस्पताल में इस प्रकार के मरीजों का
नि:शुल्क उपचार किया जाता है।
ये हैं लक्षण
गुर्दे में पत्थरी
होने पर पेट में असहनीय दर्द होता है, पेशाब में जलन या रुकावट होती है। कई
बार दर्द कमर की ओर होता है। ऐसे में मरीज को जल्द से जल्द डॉक्टर से
संपर्क करना चाहिए।