रोहतक। दिवाली के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपलों में बड़ी संख्या में खामियां सामने आने के बाद उपभोक्ताओं की सतर्कता जरूरी हो गई है। 42 सैंपलों की जांच में 13 फेल पाए गए हैं। इनमें अधिकतर सैंपल खोया और पनीर के हैं। रिपोर्ट आने के बाद मिलावट को लेकर चिंता बढ़ गई है।
पीजीआई की सीनियर डायटीशियन डॉ. पूनम कथूरिया ने बताया कि दूध से बने खाद्य पदार्थ जैसे पनीर, घी, खोया और मावा की गुणवत्ता का अंदाजा उपभोक्ता खुद भी लगा सकते हैं। पदार्थ को सूंघने पर अगर उसमें प्राकृतिक मीठी गंध आती है तो वह सही है।
वहीं, हाथ में लेकर रगड़ने पर अगर वह रबड़ की तरह खिंचने लगे या अत्यधिक सूखा महसूस हो तो उसमें मिलावट की संभावना है। बाजार से आयोडीन लेकर भी जांच की जा सकती है। किसी खाद्य पदार्थ पर आयोडीन डालने पर अगर रंग नीला या काला हो जाए तो वह मिलावटी है।
हल्के रंग की मिठाई खरीदें
मिठाइयों में कृत्रिम रंग की जांच के लिए गीले नैपकिन से रगड़ने पर अगर रंग नैपकिन पर आ जाए या मिठाई को पांच मिनट गर्म पानी में डालने पर वह रंग छोड़ दे तो मिठाई मिलावटी है इसलिए बाजार से हल्के रंग की मिठाइयां खरीदनी चाहिए क्योंकि अधिक रंगीन होने पर आर्टिफिशियल रंग की मात्रा ज्यादा हो सकती है।
मिठाई पर लगे सिल्वर भी हो सकते मिलावटी
मिठाइयों पर लगाए जाने वाले सिल्वर पेपर भी मिलावटी हो सकते हैं। अंगुलियों से रगड़ने पर अगर पेपर गायब हो जाए तो वह असली है जबकि मिलावटी पेपर इकट्ठा हो जाता है।
असली-नकली घी की भी कर सकते हैं आसानी से पहचान
डॉ. पूनम कथूरिया ने कहा कि घी में आमतौर पर रिफाइंड, वनस्पति घी या डिटर्जेंट की मिलावट की जाती है। एक चम्मच घी को गर्म कर ठंडा करने पर अगर वह जम जाए तो घी असली है। वहीं, घी में थोड़ी चीनी डालकर गर्म करने पर रंग भूरा हो जाए तो वह शुद्ध है जबकि रंग सफेद रहने पर मिलावटी होने की संभावना रहती है। दूध या दूध से बनी मिठाइयों में डिटर्जेंट की जांच के लिए पानी में डालकर हिलाने पर ज्यादा झाग बनना भी मिलावट का संकेत है।
सैंपल फेल मिलने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई जारी
डॉ. योगेश कादियान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, रोहतक दिवाली के दौरान रोहतक, महम, कलानौर और सांपला से खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए थे। रिपोर्ट में जिन दुकानदारों के सैंपल फेल पाए गए हैं उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। मिलावटखोरों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस निरस्तीकरण तक की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल कानून के अनुसार दुकानदारों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए एक माह का समय दिया गया है। इसके बाद सैंपलों की दोबारा जांच कराई जाएगी।