संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जुलाई में स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए एनीमिया मुक्त अभियान के तहत 12 हजार बच्चों के खून की जांच की गई। इनमें से तीन हजार बच्चों में खून की कमी पाई गई। यह रिपोर्ट चिंता का विषय है। इसके देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों की देखरेख के साथ ही अभिभावकों को भी जागरूक किया है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अधिकारी मीनाक्षी यादव ने बताया कि एक से 31 जुलाई तक एनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया गया। इसके तहत स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वास्थ्य विभाग की सात टीमों ने 0 से 18 साल तक के बच्चों के खून में हिमोग्लोबिन की जांच की।
एक माह तक चले अभियान के तहत तीन अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों के खून की जांच की गई। इसमें करीब 30 फीसदी बच्चों में खून की कमी पाई गई। उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयु वर्ग के हिसाब से टेबलेट और सिरप दिए गए।
दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सिविल अस्पताल की टीम ने भी बच्चों के खून में हिमोग्लोबिन की जांच की। यहां भी बच्चों में खून की कमी पाई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अभिभावकों को बच्चों की डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
एक से पांच साल : इस आयु वर्ग के बच्चों में 14 से 15 ग्राम खून होना चाहिए लेकिन 813 बच्चों में खून की कमी पाई गई। उन्हें विभाग की टीम ने आयरन की गोली और सिरप दी।
छह से 9 साल : इस आयु वर्ग के बच्चे में 12 से 13 ग्राम खून होना जरूरी है लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अभियान के दौरान बच्चों की जांच की तो 1500 बच्चों में खून की कमी मिली। इन्हें दवा वितरित की गई। खून की मात्रा अनुसार प्रतिदिन और सप्ताह में एक बार दवा लेने की सलाह दी गई है।
10 से 18 साल : इस आयु वर्ग के किशोर व किशोरी में खून की मात्रा 12 से 13 ग्राम होनी चाहिए। इस आयु वर्ग में विभाग ने आयरन की गोलियां वितरित की हैं। इस आयु वर्ग के करीब 700 किशोर-किशोरियों में खून की कमी पाई गई है।
इन बातों का रखें खयाल
बच्चों को आहार में दें हरी सब्जी
मौसम के बच्चों को फल खिलाएं
बच्चों को फास्ट फूड देने से बचें
खून की कमी मिलने पर आयरन गोली खिलाएं
वर्जन
एनीमिया मुक्त अभियान के दौरान जिन बच्चों में खून की कमी पाई गई है, उनकी हम निगरानी कर रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को पौष्टिक भोजन आहार दें। उन्हें फास्ट फूड देने से बचें ताकि बच्चे एनीमिया मुक्त हो सकें।-डॉ. विशाल राव, नोडल अधिकारी, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम