पीजीआईएमएस में जब्त किया गया अवैध इंप्लांट मामला एक ओर से पंजाब ऐंड हरियाणा हाईकोर्ट व सेवानिवृत्त जज के पास विचाराधीन है, वहीं दूसरी ओर ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों ने प्रशासन को चेेतावनी दी है कि उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है और वह 10 दिसंबर से काम रोक सकते हैं। ऑर्थो विभाग की इस कार्रवाई से प्रशासन हैरान है कि ऑर्थो के डॉक्टर कोरोना संक्रमणकाल में ऐसा पत्र कैसे लिख सकते हैं, क्योंकि वह जो मुद्दा उठा रहे हैं वह पहले ही विचाराधीन है। डॉक्टरों को न्यायपालिका पर भरोसा करना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों ने पीजीआईएमएस प्रशासन को पत्र लिखा है कि उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है। इसलिए वह 10 दिसंबर से काम नहीं करेंगे और मरीजों की सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। बताया जा रहा है कि इस पत्र की कॉपी सरकार तक भेजी गई है। ऑर्थो विभाग की इस कार्रवाई से प्रशासन हैरान है सरकारी डॉक्टर नियमों को ताक पर रखकर अपनी चिट्ठी सरकार तक कैसे भेज सकते हैं। यही नहीं जब्त इम्प्लांट मामले की सुनवाई अभी चल रही है और संस्थान, ऑर्थो के डॉक्टर यहां तक की सरकार भी निजी सप्लायरों के साथ इस केस में पार्टी हैं। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस के पूर्व निदेशक डॉ. नित्यानंद ने संस्थान में सप्लाई हो रहे अवैध इम्प्लांट सप्लायरों को परिसर में प्रवेश करने से रोका था और करोड़ों का सामान जब्त किया था। इस मामले में जीएसटी भी कार्रवाई कर चुका है और मामला अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने अगली तारीख से तीन दिन पहले जवाब दाखिल करने को कहा है और निर्देश ना मानने पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाने को कहा है।
सेवानिवृत्त जज भी कर रहे जांच
संस्थान में जब्त अवैध इम्प्लांट मामले की जांच एक सेवानिवृत्त जज भी कर रहे हैं। वह इस मामले में शिकायतकर्ता, इम्प्लांट जब्त करने वाले व ऑर्थो विभाग के डॉक्टरों को जांच में शामिल होने को बुला रहे हैं। सूत्रों की मानें तो ऑर्थो विभाग के सीनियर डॉक्टर स्वयं जाने की बजाय अपने जूनियरों को भेज देते हैं। इसलिए जांच में सीनियर डॉक्टरों को बुलाया जा रहा है जोकि सामान पकड़े जाने वाले दिन ओटी में थे। ऐसा ही एक पत्र निदेशक कार्यालय की ओर से पूर्व सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र सरोहा को भी दिया गया है कि वह सेवानिवृत्त जज के पास जांच में पहुंचे।
ऑर्थो इम्प्लांट मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट व सेवानिवृत्त जज के पास विचाराधीन है। ऑर्थो विभाग के सीनियर डॉक्टरों को दोनों पर विश्वास करना चाहिए, सत्य की जीत होगी। प्रशासन पर परेशान करने का आरोप लगाने की बजाय उन्हें जांच में शामिल होना चाहिए। किसी मरीज का कोई कार्य प्रभावित नहीं होगा। काम ना करने की चेतावनी के लिए दिए गए नोटिस के लिए जवाब मांगा गया है।
- डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस।