रोहतक। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष नगेंद्र सिंह कादियान की कोर्ट ने 30 जून को सड़क दुर्घटना में घायल उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। स्वास्थ्य बीमा कंपनी ने बीमाधारक का दावा यह कहते हुए खारिज किया था कि उनकी चोटें दुर्घटना से पहले की हैं।
आयोग ने बीमा कंपनी को 88,444 रुपये की दावा राशि पर 19 अगस्त 2020 से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने, 5,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना और 5,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 30 दिन के भीतर भुगतान के आदेश दिए हैं
शिकायतकर्ता सांपला निवासी बिजेंद्र ने आयोग को बताया कि उन्होंने साल 2019 में परिवार के लिए हेल्थ ऑप्टिमा बीमा पॉलिसी ली थी। 4 जनवरी 2019 को उनके बेटे देव कुमार की राजस्थान में सड़क दुर्घटना हो गई थी। पहले सरकारी अस्पताल और बाद में नई दिल्ली के इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार कराया गया।
बेटे के इलाज पर करीब 89,544 रुपये खर्च हुए थे। बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि घायल शराब के नशे में वाहन चला रहा था और चोटें पहले से मौजूद थीं।
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी अपने इन दोनों आरोपों के समर्थन में कोई ठोस डॉक्टरी सबूत या विशेषज्ञ की राय पेश नहीं कर सकी। एमआरआई रिपोर्ट में भी कहीं यह नहीं लिखा था कि चोटें पुरानी हैं। शराब पीकर वाहन चलाने के आरोप के समर्थन में न तो ब्लड एल्कोहल रिपोर्ट, न मेडिको-लीगल रिपोर्ट और न ही कोई विश्वसनीय दस्तावेज प्रस्तुत किया गया।