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एक फीसदी मूक बधिर ही हो पाते हैं शिक्षितः सिबाजी

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शहर के सेक्टर छह स्थित पंडित लख्मीचंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉरमिंग एंड विजुअल आर्ट (सुपवा) में मूक बधिरों की शिक्षा : चुनौतियां और समाधान विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन जा रहा है। इसमें देशभर से लगभग 150 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। पहले दिन मंगलवार को कांफ्रेंस के आयोजक सिबाजी पांडा ने कहा कि देश में 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 50 लाख मूक बधिर हैं और हरियाणा मेें यह संख्या लगभग डेढ़ लाख है। इसके बावजूद प्रदेश में महज आठ स्कूल ऐसे हैं, जहां पर मूकबधिर सांकेतिक भाषा (साइन लैंगवेज) में अपनी शिक्षा ले सकते हैं। वहीं देशभर में ऐसे स्कूलों की संख्या 500 के आसपास है, जिनसे महज एक प्रतिशत मूकबधिर ही शिक्षित हो पा रहे हैं।
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पूरी तरह से मूक बधिरों द्वारा संचालित इस अंतरराष्ट्रीय कॉफ्रेंस का आयोजन हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर स्पीच एंड हियरिंग इम्पेयरमेंट, पंचकूला, सुपवा, यूनाइटेड किंगडम की सेंट्रल लंकाशायर यूसीएलएन विश्वविद्यालय व अन्य के सहयोग से किया जा रहा है। सेमिनार में पहले दिन भारत, ब्रिटेन, अमेरिका, युगांडा और कनाडा के बधिर और शिक्षा विशेषज्ञों के शोध इनपुट शामिल रहे। इस दौरान मूकबधिरों के जीवन में आने वाली चुनौतियों की पहचान करने और बधिर शिक्षा में गुणवत्ता एवं समाधान को केंद्र में रखा गया। सुबह के सत्र का शुभारंभ यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वेद प्रकाश और कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने किया। सेमिनार के दौरान सोसायटी की एक लघु पुस्तक का विमोचन किया गया। इसमें सोसाइटी की प्रमुख पहलों और उपलब्धियों को आलेखित किया गया है।
कांफ्रेंस के आयोजक सचिव सिबाजी पांडा और डॉ. अलीम चंदानी की ओर से डेफ एजुकेशन : द वे फॉरवर्ड ’पर एक पैनल चर्चा हुई। इसके बाद रायरसन यूनिवर्सिटी से डॉ. क्रिस्टिन स्त्रो ने प्रारंभिक साक्षरता एवं साइन लैंग्वेज’ पर व्याख्यान दिया। वहीं शाम के सत्र में डॉ. अलीम चंदानी ने भारत में मूक बधिर शिक्षा के लिए कौन जवाबदेह... विषय पर चर्चा की। इस अवसर पर डीन एकेडमिक्स सुपवा, रजिस्ट्रार प्रोफेसर भारती शर्मा, डॉ. एके राजन, डीन एकेडमिक्स एमडीयू, सुपवा के वरिष्ठ संकाय सदस्य मौजूद रहे।
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मूक बधिर के लिए अपनाई जाए भारतीय साइन लैंग्वेज : प्रो. वेदप्रकाश
यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. वेदप्रकाश ने कहा कि मूक बधिर शिक्षा के क्षेत्र में समानता और गुणवत्ता के मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे विशेष छात्रों को समायोजित करने के लिए भारतीय साइन लैंग्वेज (आईएसएल) को अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने हरियाणा वेलफेयर सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. शरणजीत कौर के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि डिजिटल साइन लैंग्वेज लैब की स्थापना और प्रारंभिक हस्तक्षेप कार्यक्रम जैसी उनकी पहल समाज के मूक-बधिर छात्रों की शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास में बेहद सफल रही है।
यह कॉन्फ्रेंस विशेष बच्चों को मुख्यधारा में लाने का मजबूत साधन : प्रो. राजबीर
सुपवा के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि यह दो दिवसीय सम्मेलन विशेष बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक मजबूत साधन की भूमिका निभाएगा। विशेष बच्चों की अनुसंधान, प्रशिक्षण और विचार-विमर्श में भागीदारी करने के लिए शिक्षा जगत के विद्वानों के कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी है। विशेष बच्चों के लिए भविष्य में इस तरह की कई अन्य पहल की जाएंगी। सुपवा ने पहले ही ऐसे सहयोग के लिए हरियाणा वेलफेयर सोसाइटी के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे।
मूकबधिर को सामान्य बच्चों की तरह आगे बढ़ने के मिलें अवसर : डॉ. शरणजीत कौर
हरियाणा वेलफेयर सोसायटी फॉर स्पीच एंड हियरिंग इंपयिरमेंट पंचकूला की अध्यक्ष डॉ. शरणजीत कौर ने कहा कि मूकबधिर बच्चों को सीखने और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर दिए जाने चाहिए। बोली जाने वाली भाषा के माध्यम से संवाद करने में असमर्थता उन्हें आगे बढ़ने से वंचित करती है। इन बच्चों को समाज के अन्य बच्चों की तरह सम्मान के साथ जीने और सीखने का अधिकार है। पिछले कुछ वर्षों में सोसायटी ने कई पहल की हैं। सोसायटी की यह पहल समाज के विशेष बच्चों के एक बड़े समुदाय को लाभान्वित करेगी।
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