नारनौल। दिगंबर जैन समाज के महान दसलक्षण पर्व (प्रर्युषण पर्व ) के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म का पालन किया गया। सुबह से शहर के तीनों मंदिरों में अभिषेक करने र दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा।
श्री 1008 पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य नितिन जैन को प्राप्त हुआ। वहीं शांतिधारा करने का सौभाग्य कलश जैन और शुभम जैन को मिला।
पारस बाबा की जय के साथ शांति धारा का उच्चारण कपिल जैन ने किया। जिसके पश्चात अष्ट द्रव्य से संगीत, भक्ति एवं आराधना के साथ पूजन कर अर्घ्य चढ़ाए गए।
समाज के छोटे-छोटे बच्चों ने फैंसी ड्रेस के माध्यम अनेक त्याग, तपस्या, संयम, तप, साधना के बारे में संदेश दिया। इसमें राजा सिद्धांत, संयम दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र, भगवान बाहुबली, आचार्य विद्याधर, राम लक्ष्मण आदि के रूप में बच्चों ने समाज को उनके जीवन से जुड़े कुछ संदेश दिए।
मध्य प्रदेश से आईं ब्रह्मचारी साधना दीदी ने कहा कि हमें अपने जीवन में कभी लोभ नहीं करना चाहिए। हमें जितना मिलता है उसमें संतोष करना चाहिए। व्यक्ति के पास 65 रुपये थे तब उसको 650 करने का मन बन गया और जब 650 हो गए तो 6500 करने का मन बना लिया।
ऐसे करते-करते उसका मन लोभी होता चला गया। इस अवसर पर राजकुमार जैन, कपिल जैन, नरेश जैन, विजय जैन, अजीत प्रकाश जैन, मनोज जैन, मोक्ष जैन, मनीष जैन, नितिन जैन, शुभम जैन के अलावा जैन समाज की महिला, बच्चे उपस्थित थे।