कलानौर। कलानौर कलां जिंदरान और कलानौर खुर्द गुढ़ान कभी ग्राम पंचायत में शामिल थे। पहली बार 1971 में यहां नगरपालिका बनी तो लोगों में उत्साह जगा और विकास कार्यों की आस भी जगी। तीन वर्ष के लिए चेयरमैन का कार्यकाल 13 वार्डों के साथ शुरू हुआ, जोकि जनसंख्या बढ़ने के साथ 2013 में 15 वार्डों में तबदील हो गया। अब 2023 में यह संख्या 16 हो गई। नया वार्ड बीसी ए महिला आरक्षित भी हो गया है।
पहली बार नोटिफाइड कमेटी के पहले नगरपालिका चेयरमैन कांग्रेस के सरदार जीतपाल सिंह बने। बाद में 1987 में चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई और जनता द्वारा पहली बार बज्र लाल चुघ चेयरमैन बने। 1991 में दूसरे चेयरमैन रमेश बहल, 1994 में तीसरे शेर सिंह चेयरमैन बने। 2001 में नगरपालिका भंग कर दी गई। इसके बाद 2003 में पहली महिला आरक्षित सीट पर सुरेखा चेयरमैन बनी। 2005 लक्ष्मी देवी तो 2008 में सर्वजीत कौर चेयरमैन बनीं। इसी के साथ वार्ड नं 14, 15 और बनाएं गए और 15 वार्डों के साथ 2013 में राकेश बतरा नगरपालिका चेयरमैन पद पर आसीन हुए। 2019 में ममता रानी ढाई वर्ष व प्रवीण कुमारी 2 वर्ष के लिए नगरपालिका चेयरमैन पद पर कार्यरत रहीं। अब चेयरमैन का कार्यभार पांच वर्ष के लिए हो गया है। खास बात है कि वार्ड तीन की अधिक वोट को नए वार्ड में जोड़कर सभी 16 वार्डों में मतदाताओं की संख्या को लगभग एक समान कर दिया गया है।
भाजपा ने नहीं बनाया एक भी चेयरमैन
कलानौर नगरपालिका में पहले ही विभिन्न पार्टियों से नगरपालिका के चेयरमैन बने, लेकिन 1971 से लेकर 2023 तक कोई भी चेयरमैन भारतीय जनता पार्टी से नहीं बना। सभी चेयरमैन कांग्रेस व अन्य दलों से पद पर आसीन हुए हैं। ऐसे में वर्ष 2021 में भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव पारित करवा कर वाइस चेयरमैन सुनील कत्याल को नगरपालिका का कार्यभार की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन उसके बाद भाजपा से ही कांग्रेस में शामिल होकर प्रवीण कुमारी ने दोबारा से नपा चेयरमैन की कुर्सी हासिल कर ली।
नपा के आरक्षित वार्डों के लिए ड्राॅ निकाला
कलानौर नगरपालिका की वार्डबंदी के साथ-साथ अब 15 वार्ड की जगह 16 वार्ड बनाएं गए हैं। शुक्रवार को रोहतक कमिश्नर जितेन्द्र कुमार, एसडीएम राकेश सैनी, नपा सचिव प्रदीप जैन,एमई पंकज गर्ग, पार्षद मनजीत सिक्का, पार्षद सुनील कत्याल, पार्षद कमलेश रानी, पार्षद सत्यवान भट्टी, पार्षद राजेश वाल्मिकी की मौजूदगी में आरक्षित वार्डों का ड्राॅ निकाला गया।
जनगणना के आधार पर वार्ड नं 14 में बीसीए की जनसंख्या 50 प्रतिशत से ज्यादा है, जबकि 15 वार्ड में 30 प्रतिशत बीसीए के लोग हैं। उसको आरक्षित कर दिया गया है। आज तक नगरपालिका के लिए वार्ड को आरक्षित करने के लिए ड्रा नहीं किया गया। जनसंख्या के आधार पर ही वार्ड आरक्षित किया जाता था। इस प्रक्रिया से असहमति जताई जा रही है। बीसी ए के लोगों का अधिकार छीना गया है। अधिकारियों ने अपनी मनमानी करते हुए सता का दुरुपयोग किया है।
- भूप सिंह चौहान, 1993 के कार्यवाहक चेयरमैन।