संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। पीजीआईएमएस के मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष और नोडल ट्रीटमेंट सेंटर के इंचार्ज डॉ. प्रवीण मल्होत्रा ने बताया कि अब तक नेशनल प्रोग्राम के तहत सभी हेल्थ वर्कर्स को निशुल्क हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लगाई जा रही थी। अब उन लोगों को भी उपलब्ध करवाई जा रही जिन्हें हेपेटाइटिस बी का खतरा रहता है।
कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. वरुण अरोड़ा ने बताया कि 12 वर्ष में हेपेटाइटिस सी के करीब 26 हजार व हेपेटाइटिस बी के 12 हजार मरीजों का पंजीकरण किया जा चुका है। इन मरीजों पर कई शोध भी की गई। स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. पुष्पा दहिया के नेतृत्व में रिसर्चर डॉ. वाणी मल्होत्रा ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग के डॉ. परमजीत सिंह गिल के साथ मिलकर मां से बच्चों में जाने वाले हेपेटाइटिस बी को रोकने संबंधी शोध में सफलता प्राप्त की है।
डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि महिलाओं में काला पीलिया होने पर गर्भपात होने की ज्यादा आशंका रहती है। रिसर्च में पाया गया कि हेपेटाइटिस बी में 30 प्रतिशत और हेपेटाइटिस सी में 26 प्रतिशत तक गर्भपात होने की आशंका रहती है। इनमें सबसे ज्यादा 20 से 30 वर्ष की महिलाएं थीं। पहले तीन माह के दौरान गर्भपात का खतरा ज्यादा पाया गया। रिसर्च में करीब 60 फीसदी महिलाओं में एक बार गर्भपात पाया गया। 40 प्रतिशत महिलाओं में दो बार से अधिक गर्भपात पाया गया। यदि शादी से पहले जांच के दौरान काला पीलिया नहीं मिलता है तो हेपेटाइटिस बी की वैक्सीन लगवानी चाहिए। इसके विपरीत अगर मिलता है तो समय पर इलाज से काफी हद तक इसको खत्म किया जा सकता है।