कोरोना का असर अब धान की रोपाई पर भी पड़ रहा है। अधिकारिक तौर पर रोपाई 15 जून से शुरू हो चुका है, लेकिन हर बार इस काम को अंजाम देने वाले प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों को लौट चुके हैं। ऐसे में जिले के किसान रोपाई के लिए अपने मजदूरों को उनके घर से लाने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन भी इस समस्या को समझते हुए निर्धारित दस्तावेज जमा करवाने पर उन्हें अनुमति दे रहा है। जिले में धान का रकबा करीब 1.07 लाख एकड़ है। इसके ज्यादातर हिस्से में बासमती किस्म ही लगाई जाती है। अधिकतम किसान धान की पौध तैयार कर उसकी रोपाई करवाते हैं। रोपाई का काम उत्तर प्रदेश और बिहार से आने वाले मजदूर ही करते रहे हैं। लेकिन इस बार कोरोना के चलते प्रवासी श्रमिकों का पलायन हो गया। धान की रोपाई शुरू होने से ऐन पहले वे अपने गृह राज्यों को चले गए। इसके चलते किसानों को धान की रोपाई करवाने में समस्या आ रही है। ऐसे में किसानों ने अपने खर्च पर वाहन ले जाकर मजदूरों को लाने की तैयारी की है। जिनके मजदूर यूपी में है, वे तो ला सकते हैं। लेकिन बिहार के मजदूरों का बिना ट्रेन के आना संभव नहीं है। किसान अपने मजदूरों से फोन पर संपर्क कर उन्हें तैयार कर रहे हैं। अभी तक जिला प्रशासन ने सिंहपुरा के किसान को उत्तर प्रदेश से मजदूर लाने के लिए अनुमति दी गई है। वहीं, घरौथी का एक किसान भी उत्तर प्रदेश के ही पीलीभीत से मजदूर लाने के लिए दस्तावेज तैयार कर रहा है। मदीना के एक किसान ने भी यूपी से मजदूर लाने की तैयारी की है। इसी तरह जिले के कुछ और किसान भी तैयारी कर रहे हैं।
क्या है प्रक्रिया
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. रोहताश सिंह ने बताया कि इसके लिए किसान को अपना और जितने मजदूर लाने हैं, उन सभी के आधार कार्ड की कॉपी जमा करवानी होती है। इसके अलावा जो वाहन जा रहा है उसके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और ड्राइवर का लाइसेंस व आधार कार्ड की कॉपी लगती है। फिर अनुमति दी जाती है। लेकिन किसान को कोरोना से संबंधित गाइडलाइन का पालन करना होता है। वाहन में क्षमता से कम लोग ही आएंगे ताकि सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे है। मास्क, सैनिटाइजर आदि का प्रयोग जरूरी है। आने के बाद प्रशासन को सूचना देनी होगी।
आ नहीं रहे मजदूर
प्रशासन ने अब तक सिर्फ गांव सिंहपुरा के एक किसान को मजदूर लाने की इजाजत दी है। उस किसान ने फतेहपुर, उत्तर प्रदेश से 12 मजदूर लाने की इजाजत मांगी थी। लेकिन आए सिर्फ दो मजदूर। कोरोना के मद्देनजर प्रवासी मजदूर भी घरों से निकलने से कतरा रहे हैं।
अपनी गाड़ी से बढ़ेगा खर्च
किसान सभा के प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि किसान अपनी गाड़ी से मजदूर लेने जाएंगे तो उनका खर्च बढ़ जाएगा। घरौथी के किसान ने पीलीभीत से मजदूर लाने की तैयारी की है। उसने क्रूजर बुक की है, जिसमें आमतौर पर 15 लोग बैठ जाते हैं। लेकिन कोरोना के चलते सामाजिक दूरी बनानी पड़ेगी, इसलिए 10 मजदूर ही आ सकेंगे। यहां से पीलीभीत जाने-आने पर काफी पैसे खर्च हो जाएंगे।
बहुत से किसानों ने की सीधी बिजाई
मजदूरों की समस्या को देखते हुए इस बार जिले के बहुत से किसानों ने धान की सीधी बिजाई को अपनाया है। इसमें मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ती। मशीन के जरिये खेत में सीधी बिजाई हो जाती है। पिछले साल जिले में सीधी बिजाई का रकबा सिर्फ 250 एकड़ था, जो इस बार अब तक 6700 एकड़ पहुंच चुका है।