रोहतक। आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों को जल्द ही पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाएगा। बच्चों को हरी सब्जियां और फल दिए जाएंगे।
कोरोना काल में लोगों के लिए पौष्टिक आहार की उपलब्धता कम हो रही है। छोटे बच्चे इस लिहाज से और ज्यादा संवेदनशील हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक को एनीमिया की आशंका जताई जा रही है। जिसे देखते हुए महिला व बाल विकास विभाग ने जिले के सौ आंगनबाड़ी केंद्रों में किचन गार्डन विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी सौ केंद्रों का चयन कर लिया गया है। इनमें वे केंद्र हैं, जो सरकारी बिल्डिंग में चल रहे हैं और जहां किचन गार्डन विकसित करने को जमीन उपलब्ध है। केंद्र सरकार की ओर से आई एडवाइजरी के मुताबिक ही चुने गए केंद्रों की आंगनबाड़ी वर्करों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्हें खास तरह की सब्जियों और फलों के पौधे लगाने को कहा गया है। सभी ब्लॉकों ने अपनी सुविधा और जगह के हिसाब से सब्जी, फल चुन लिए हैं। जिनमें लौकी, टमाटर, हरी मिर्च, प्याज, पालक, पुदीना, मेथी, घीया, कद्दू, धनिया, आलू, भिंडी, तोरई, बैंगन, गोभी, भिंडी, करी पत्ता आदि शामिल हैं। कुछ केंद्रों में एलोविरा, तुलसी, नीम और गिलोय जैसे मेडिसिनल प्लांट लगाए जाएंगे। इनके बीज आदि खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी तरह फलों में आम, अमरूद, जामुन, पपीता, अनार, नींबू, किन्नू, आड़ू, आंवला, बेर आदि के पौधे लगाए जाएंगे। सभी सौ केंद्रों में कौन सी सब्जी और फल लगेंगे, इसकी सूची विभाग के पास आ चुकी है। सभी केंद्र दो माह के लिए माली रखेंगे, आवश्यक खाद, कीटनाशक खरीदेंगे। हर केंद्र को 1500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। सब्जियों की फसल जल्द तैयार हो जाएगी, पर फलों को तीन साल तक लगेंगे। अभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं, पर सरकार अक्तूबर से स्कूल खोलने पर विचार कर रही है। तब आंगनबाड़ी केंद्र भी शुरू हो जाएंगे।
ब्लॉक - आंगनबाड़ी केंद्र
चिड़ी - 15
कलानौर - 15
महम - 25
रोहतक ग्रामीण - 25
रोहतक शहरी - 5
सांपला - 15
कुल - 100
खर्च प्रतिमाह
सब्जी, मेडिसिनल प्लांट के बीज - 250 रुपये
फलों के पौधे ------- 500
खाद, कीटनाशक - 250
माली - 500
कुल - 1500
जिले के सौ आंगनबाड़ी केंद्रों में किचन गार्डन विकसित किए जाएंगे। ताकि बच्चों को हरी सब्जियां, फल आदि उपलब्ध करवाए जा सकें। किचन गार्डन विकसित होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
-बिमलेश कुमारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला व बाल विकास