कैथल। पिछले साल से दिल्ली से सटे एनसीआर जिलों से कैथल में खटारा बसों को भेजने का सिलसिला 10 माह के बाद भी खत्म नहीं हो रहा है। रेवाडी, झज्जर व पलवल से कैथल में भेजी जर्जर बसों के बाद अब रोहतक से भी बीएस-4 तकनीक की 20 बसों को भेजने की तैयारी है। यह भी जल्द ही डिपो में शामिल होंगी।
पिछले साल ही नवंबर व दिसंबर में ज्यादा प्रदूषण होने के चलते कैथल से बीएस-6 तकनीक की 48 बसों को एनसीआर में आने वाले जिलों में भेजा गया था जबकि इसके बदले में बीएस-3 व 4 तकनीक की बसों को कैथल में भेजा दिया गया। इनमें से ही अधिकतर बसें रूट पर रास्ते में ही खड़ी हो रही हैं। अब यदि ये बसें बेड़े में शामिल होती तो खटारा बसों की संख्या बढ़कर 92 हो जाएंगी।
डिपो में परिवहन के बेड़े में सबसे ज्यादा बसों की हालत खराब है जो अब भी अन्य जिलों से बसों को भेजा रहा है। मार्च व अप्रैल में बीएस-4 तकनीकी की 72 बसें आई थीं। इसमें से कई बसों को अभी भी कार्यशाला में ठीक होने की बाट जोहती हैं। ऐसे में कैथल के यात्रियों को दूर के सफर में दूसरे अन्य जिलों से होकर गुजरने वाली बसों में सफर करना पड़ता है।
कैथल से चंडीगढ़, दिल्ली, जयपुर, कटरा, अमृतसर हरिद्वार व अन्य रूट पर नई तकनीक की बसों को चलाया जाता है लेकिन बसों की संख्या कम होने के चलते परिवहन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हाल ही में डिपो में 10 नई एसी बसें आई थीं जिसके बाद जिले में बसों की कमी होने के चलते कुछ उम्मीद जगी थी लेकिन फिर बाद में दोबारा फिर खटारा बसों को शामिल किया जा रहा है। इसके बाद इन जिलों से पुराने वाहनों को हटाकर अन्य जिलों में भेजा जाने लगा।
इसी प्रक्रिया के तहत पिछले आठ महीनों में कैथल डिपो में कुल 70 जर्जर बसें शामिल हो चुकी हैं। वहीं, इसके बदले बीएस-6 तकनीक की 48 नई बसें एनसीआर जिलों को भेजी गई हैं। इन बसों के आने से डिपो के बेड़े में संख्या बढ़कर 202 तो हो गई है लेकिन लगातार खराबी और ब्रेकडाउन की वजह से रूटों पर समस्याएं और ज्यादा बढ़ गई हैं।
ऐसे में बस खराब होने पर यात्रियों को बहुत दिक्कतें होती हैं। इन बसों की हालत इतनी खराब है कि इन्हें रूट पर चलाना मुश्किल हो रहा है। कई बसों के शीशे टूटे हुए हैं, सीटें पूरी तरह फटी पड़ी हैं और कुछ सीटों का लोहे का ढांचा तक बाहर निकल आया है। ऐसे में यह बसें यात्रियों के लिए कितनी सुरक्षित और आरामदायक होंगी, यह एक बड़ा सवाल है।
कैथल डिपो में लगातार आ रही जर्जर बसों के कारण यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। सरकार को चाहिए तो यह था कि कैथल में बसों की संख्या बढ़ाने के लिए नई बसें भेजे लेकिन स्थिति इसे उलट हो चुकी है। सरकार कैथल के साथ एक सौतेली मां जैसा व्यवहार कर रही है। सरकार से मांग है यात्रियों को रोडवेज कर्मियों की सुरक्षा के लिहाज से भी पुरानी की बजाय नई बसों को शामिल करें।
- संदीप खटकड़, डिपो प्रधान हरियाणा रोडवेज जागृति मंच, कैथल।
वर्जन
अभी तक रोहतक से बीएस-4 बसें आने को लेकर मुख्यालय से जानकारी मिली है लेकिन अभी तक यह बसें नहीं मिली हैं। अगले एक से दो दिन में यह आएंगी। इस समय कार्यशाला में 10 से 15 बसें औसतन ठीक होने के लिए खड़ी रहती हैं। सरकार के आदेशों के तहत पुरानी बसों को चलाया जाता है।
-अनिल चोपड़ा, कार्यशाला प्रबंधक, कैथल डिपो