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मोबाइल नहीं, आप अपने हाथों में लिए हैं संक्रमण

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देश दुनिया से जुड़ने के लिए हमने अपने हाथों में मोबाइल नहीं संक्रमण का जरिया थाम लिया है। हर समय साथ रहने वाला हमारा मोबाइल थोड़ा बहुत नहीं, टायलेट सीट से दस गुणा ज्यादा संक्रमित होता है। इसकी बड़ी वजह हाथों की तरह बार-बार मोबाइल की सफाई नहीं होना है। यह कहना है प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र पीजीआईएमएस के विशेषज्ञों का। मंगलवार को पीजीआईएमएस के माइक्रो बायोलॉजी विभाग की ओर से हास्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किया गया। यहां इन्फेक्शन को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञों व विद्यार्थियों ने चिंतन किया। विशेषज्ञों ने स्वच्छता में खासकर हाथों की सफाई पर जोर दिया और मोबाइल को संक्रमण का बड़ा कारण बताया। वहीं उन्होंने इन्फेक्शन से ग्रसित मरीज के संपर्क में जाने से पहले सुरक्षा उपायों को इस्तेमाल में लाने पर जोर दिया गया। इसमें ग्लव्ज, मास्क व अन्य उपाय शामिल हैं।
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कुलपति के मोबाइल का लिया गया सैंपल
कार्यक्रम में हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. ओपी कालरा के मोबाइल का सैंपल लिया गया। इसमें एक सैंपल मोबाइल को कीटाणु रहित करके व एक सैंपल इससे पहले लिया गया। इसकी रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन का समय लगेगा। एमबीबीएस विद्यार्थियों ने भी अपनी पेंटिंग्स व रंगोली के जरिए इंफेक्शन के खतरे के प्रति सचेत करते हुए इंफेक्शन चेन तोड़ने की अपील की।
सैनिटाइजर से मोबाइल को भी करें साफ
इंफक्शन से बचने के लिए अपने हाथों की तरह मोबाइल को भी साफ रखने की जरूरत है। इसके लिए एंटीसेप्टिक सोल्यूशन इस्तेमाल बेहतर है। सैनिटाइजर से हर सप्ताह या दस दिन में चार से पांच मिनट तक मोबाइल को रब करना चाहिए। क्योंकि मोबाइल के कारण हानिकारक कीटाणु या वायरस हमारे साथ ही रहने लगे हैं और धीरे-धीरे हम रोगों के शिकार हो जाते हैं। खासकर जब मामला अस्पताल का हो तो मामला और गंभीर बन जाता है। यहां इन्फेक्शन का स्तर ज्यादा रहता है। इससे बचने के लिए हमें अपने हाथ जरूर धोने चाहिए।
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मोबाइल पर बार-बार गंदे हाथ लगने से होता है इन्फेक्शन
मोबाइल इन्फेक्शन का बड़ा जरिया है। यह टॉयलेट सीट से दस गुणा ज्यादा इंफेक्टेड होता है। टॉयलेट सीट एक जगह रहती है। यहां मल से इंफेक्शन की आशंका रहती है। जबकि मोबाइल हमारे से साथ रहता है। यह घर, बाजार, सड़क, दुकान, अस्पताल हर जगह जाता है। कहीं गंदगी कम होती है तो कहीं ज्यादा। हर जगह के कीटाणु हमारे कपड़े, हाथों व त्वचा के साथ मोबाइल पर चिपकते रहते हैं। इस पर दिन भर गंदे हाथ लगते रहते हैं। मोबाइल प्रयोग करते समय बार-बार इसे छूना, कहीं रखना, उठाना इन्फेक्शन का जरिया बनता है। अस्पताल में काम करते समय मोबाइल पर बात करने या इसे इस्तेमाल करने से परहेज बरतना बेहतर है। यही इन्फेक्शन से बचने का बेहतर उपाय है।
- डॉ. पारुल पुनिया, असिस्टेंट प्रोफेसर, माइक्रोबायोलाजी विभाग, पीजीआईएमएस।
अस्पताल के कीटाणु होते हैं रजिस्टेंस
इन्फेक्शन का मुख्य कारण कीटाणु होते हैं। जब कभी हम किसी इन्फेक्टेड मरीज या व्यक्ति से मिलते हैं तो ये हमारे कपड़े, हाथों व त्वचा पर चिपक जाते हैं। अस्पताल में यह स्थिति ज्यादा गंभीर होती हैं। यहां इन्फेक्शन की आशंका कीटाणु अधिक होने की वजह से बढ़ जाती है। अस्पताल के कीटाणु ज्यादा खतरनाक होते हैं। इसकी वजह मरीज को दी जा रही दवा के प्रति उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ना है। अस्पताल में वेंटिलेटर, कैथेटर, स्टैथोस्कॉप, बेड, बेड शीट हर चीज पर कीटाणु होते हैं।
- डॉ. निधि गोयल, प्रोफेसर, माइक्रोबायोलाजी विभाग, पीजीआईएमएस।
हाथ धोकर ही कम कर सकते हैं इन्फेक्शन का खतरा
संक्रमण अनेक रोगों की जड़ है। इसी से रोग गंभीर बनता है। इसे रोककर हम बीमारी पर अंकुश लगा सकते हैं। इसलिए इन्फेक्शन के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। कैंपस में पहली बार इन्फेक्शन पर कार्यक्रम होना अच्छा प्रयास है। यह होना चाहिए। मोबाइल फोन भी इन्फेक्शन का जरिया है। इसलिए मोबाइल फोन प्रयोग करने वालों को सावधानी बरतनी चाहिए।
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- डॉ. ओपी कालरा, वीसी, हेल्थ यूनिवर्सिटी।
यूं करें बचाव
- मरीज से मिलते समय या इलाज करते समय ग्लव्ज व मास्क जरूर पहने।
- पहने गए ग्लव्ज व मास्क सावधानी पूर्वक उतार कर नष्ट करना जरूरी है।
- इन्फेक्शन से बचने के लिए हाथ जरूर धोने चाहिए।
- इन्फेक्टेड व्यक्ति से मिलने के बाद हाथ जरूर धोएं।
- इन्फेक्टेड व्यक्ति से हाथ मिलाने या गले लगने से बचें।
- टीबी के मरीज मुंह पर मास्क का प्रयोग जरूर करें।
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