संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। सेल्फी विद डॉटर अभियान के तहत महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में राज्यस्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नोएडा की खुशी को बेस्ट सेल्फी ऑफ द ईयर का अवाॅर्ड और मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गोटे गांव खेड़ा की पंचायत को सेल्फी विद डॉटर पंचायत का अवाॅर्ड दिया गया। समारोह में महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल समेत 17 राज्यों की लड़कियों व उनके अभिभावकों ने भाग लिया।
एमडीयू के यूनिवर्सिटी आउटरीच प्रोग्राम, डीन स्टूडेंट वेलफेयर ऑफिस, वूमेन स्टडी सेंटर और सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भारतीय पुनर्वास परिषद की चेयरपर्सन डॉ. शरणजीत कौर बतौर मुख्य रहीं। एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने समारोह की अध्यक्षता की।
सरपंच प्रियंका ने गांव में पैदा होने वाली हर लड़की की फोटो की अपलोड
10वें सेल्फी विद डॉटर दिवस पर सोमवार को एमडीयू में समारोह का आयोजन किया गया है। गोटे गांव खेड़ा की पंचायत ने कुल 27 पंचायतों को पछाड़ते हुए सेल्फी विद डॉटर पंचायत का अवाॅर्ड हासिल किया है। गोटे गांव खेड़ा की सरपंच प्रियंका ने गांव में पैदा होने वाली हर लड़की की फोटो सेल्फी विद डॉटर पर अपलोड की। कार्यक्रम कन्या भ्रूण हत्या रोकने और गाली बंद घर अभियान को समर्पित रहा।
9 जून 2015 को जींद से हुई थी सेल्फी विद डॉटर अभियान की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रचारित सेल्फी विद डॉटर अभियान की शुरुआत 9 जून 2015 को हरियाणा के जींद जिले से हुई थी। सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के अध्यक्ष सरपंच सुनील जागलान ने एलान किया कि 11वें वर्ष के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में कन्या भ्रूण हत्या रोकने व गाली बंद घर अभियान को गति दी जाएगी।
बेस्ट सेल्फी ऑफ द ईयर का अवाॅर्ड प्राप्त करने वाली नोएडा की खुशी की माता ने अपने बल पर बेटी का पालन पोषण करके उसे सफल महिला उद्यमी बनाया। खुशी सिंगल मदर चाइल्ड है और कुछ समय पहले तक धारा प्रवाह गालियां देती थी। दो साल से सेल्फी विद डॉटर के साथ जुड़कर काम कर रही हैं।
पश्चिम बंगाल की राईहाना ने पश्चिम बंगाल की राईहाना ने अपने पिता की गालियों को बंद करवाने का अभियान अपने ही घर में चलाया हुआ है। उसके माता-पिता बातचीत में भी गालियों का प्रयोग करते थे। यह एक तरह का मानसिक रोग है। अभियान के चलते अब उसके माता-पिता का गालियों पर काफी हद तक नियंत्रण है।
कार्यक्रम में दिव्यांग रिदम, बीडीपीओ मोनिका, महाराष्ट्र के सेवाग्राम की पूर्व सरपंच सुजाता, हरियाणा की सोनिया ढांडा, मध्य प्रदेश के देवास गांव के सरपंच रोहित तिवारी, पश्चिम बंगाल की राईहाना और मेवात की अंजुम इस्लाम ने अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कीं। मूल रूप से दिल्ली निवासी व अब इंग्लैंड में रहने वाली रमिका इस साल की तीसरी विजेता हैं, जो नेशनल यूथ आर्ट ट्रस्ट यूके की निदेशक हैं।
इस अवसर पर एमडीयू के रजिस्ट्रार कृष्णकांत, किआ मोटर्स की निदेशक प्रीति बंसल, सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के अध्यक्ष सुनील जागलान, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. रणदीप राणा, डीन सीडीसी प्रो. विनीता हुड्डा व विभिन्न संकायों के डीन आदि उपस्थित रहे।