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कर्ज पर कोई बात नहीं, गेहूं का बोनस भी नहीं दिया

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मकड़ौली टोल प्लाजा पर धरना दे रहे किसानों ने हरियाणा सरकार के बजट को बेहद निराशाजनक बताया है। किसानों की सबसे प्रमुख मांग कर्ज माफी पर बजट में कोई बात ही नहीं हुई। किसानों को उम्मीद थी कि आंदोलन के चलते शायद राज्य सरकार किसानों के हित में घोषणाएं करेगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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मकड़ौली धरना अध्यक्ष राजू मकड़ौली ने कहा कि बजट में किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। न तो सरकार ने बजट में खेतीबाड़ी के लिए कुछ किया है और न ही यह भविष्य में करेगी। किसानों से वोट लेने थे, ले लिए, अब सरकार को किसानों से कोई मतलब नहीं है। यह व्यापारियों की सरकार है। संदीप सिसरौली कहते हैं कि कांग्रेस सरकार के समय लगातार किसानों को बोनस मिलता था। केंद्र सरकार गेहूं पर जितना भी एमएसपी घोषित करती थी, राज्य सरकार अपनी ओर से 100 रुपये बोनस देती थी। लेकिन भाजपा-जजपा सरकार ने कुछ नहीं किया। किड़वाली के सरपंच विजेंद्र ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि किसानों को बैंक से कर्ज देने पर सरकार कोई घोषणा करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज हालत यह है कि अगर किसान अपनी जमीन पर कर्ज लेकर ट्रैक्टर लेना चाहें तो उन्हें बैंकों से लोन नहीं मिलता। दोगुने ब्याज पर निजी फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेना पड़ता है। एचएस हुड्डा ने कहा कि पहले नहर का पानी तीस दिन के बाद आता था, किसानों को सिंचाई के लिए सुविधा रहती थी। लेकिन मौजूदा सरकार के राज में नहरी पानी पचास दिन बाद आ रहा है, वह भी सिर्फ एक सप्ताह के लिए। सरकार ने बजट में इसके लिए भीा कोई प्रावधान नहीं किया। बलबीर फौजी ने कहा कि पंजाब में किसानों को खेतीबाड़ी के लिए बिजली मुफ्त दी जाती है। इससे उनकी खेती पर लागत थोड़ी कम हो जाती है। लेकिन हरियाणा सरकार ने किसानों के हित में ऐसा कोई एलान नहीं किया। सुरजा पंडित ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को सौ दिन से ज्यादा हो गए हैं। उन पर फैसला केंद्र सरकार ने लेना था। ऐसे में लग रहा था कि राज्य सरकार किसानों के हित में अपनी तरफ से कोई घोषणा करेगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
पेंशन बढ़ोतरी वादाखिलाफी
अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान प्रीत सिंह ने कहा कि सरकार बुढ़ापा पेंशन में 250 रुपये बढ़ाकर अपनी पीठ थपथपा रही है, दरअसल यह वादाखिलाफी है। जेजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में लिखा था कि सत्ता में आते ही सभी पेंशन 5100 रुपये प्रतिमाह करेंगे, अब सिर्फ 250 रुपये बढ़ाए हैं। जेजेपी ने स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने और किसानों का कर्ज माफ करने का भी वादा मेनिफेस्टो में किया था, पर कुछ नहीं किया। किसानों के कर्ज और सब्सिडी के बारे में बजट में कोई जिक्र ही नहीं है। किसानों के लिए यह बेहद निराशाजनक बजट है।
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