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Rohtak News: बजट न अधिकार, कैसे हो गांवों का विकास

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रोहतक। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के नाम पर जर्जर हालात स्कूल भवन, स्वास्थ्य के नाम बीमार व्यवस्था, गली-गली पसरा कूड़ा विकास मूल तस्वीर और सरकारी दावों को साफ दर्शाता है। गांवों में विकास के लिए सरकार की ओर से सरपंचों को दिया जा रहा सीमित बजट और अधिकार केवल नाम मात्र हैं। यह बातें बुधवार को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के उपलक्ष्य में आईएमटी कार्यालय में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में पहुंचे सरपंचों ने कहीं।
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कार्यक्रम में उन्होंने ग्रामीण व्यवस्था व विकास से संबंधित विचार बेबाकी से रखे। सरपंचों ने वर्ष 2011 में की जनगणना के आधार पर दी जा रही व्यवस्था को नाकाफी बताया। इसमें बजट, सफाई कर्मी व अन्य जरूरी चीजें शामिल है।


गांव में स्कूल भवनों की हालत जर्जर है। मजदूरों को मनरेगा योजना के जरिए मिलने वाला वेतन आठ माह से नहीं मिला है। सरकार से मिलने वाला बजट केवल गांव की साफ-सफाई में ही खत्म हो जाता है। - स्वराज, सरपंच, चमारियां गांव
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सरपंच के अधिकार हमसे छीनकर सरकार ने अधिकारियों को सौंप दिए हैं। गांव में सरपंच मानों केवल साफ-सफाई कराने के लिए ही रहा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों का विकास नेताओं के भाषण तक ही सीमित रह गया है। हकीकत गांव वाले जानते हैं।
- संजय, सरपंच, बहु जमालपुर गांव

आपातकालीन स्थिति में विकास कार्यों के अधिकार सरपंच को सौंपने चाहिए। बारिश के पानी की निकासी, टूटा पुल या सड़क निर्माण इसमें मुख्य हैं। गांवों में खेल सुविधाएं नाम की हैं। इन पर ध्यान देने की जरूरत है।
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- विक्की, प्रतिनिधि, सरपंच शर्मिला, हुमायूंपुर।

सरपंचों की सरकार से मुख्य मांगें
1. सभी गांवों में ग्राम सचिवालय बनवाए जाए।
2. प्रति माह सरपंचों को दिए जाने वाले बजट में बढ़ोतरी की जाए।
3. खेल सुविधाओं में विस्तार के तहत गांवों में व्यायामशालाएं बनवाई जाएं।
4. चौपाल की जिम्मेदारी जो जिला परिषद को सौंप दी गई हैं वह दोबारा से सरपंचों को दी जाए।
5. मुख्य रास्तों के देखरेख की जिम्मेदारी भी जिला परिषद से लेकर दोबारा सरपंचों को दी जाए।
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