रोहतक। अतिरिक्त एवं जिला सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सिंह की अदालत ने जानलेवा हमले के आरोप में सांघी गांव के दो युवकों सचिन व विकास को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। पुलिस आरोपों को साबित नहीं कर सकी। फाॅरेंसिक जांच में भी यह साबित नहीं हो सका कि बरामद चाकू से हमला किया गया था।
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक, 2017 में सांघी गांव निवासी कृष्ण ने सदर थाने में शिकायत दी कि उसके भाई सुरेश कुमार पर गांव के युवक सचिन व विकास ने रंजिश के चलते जानलेवा हमला कर दिया। आरोपियों उस पर चाकू से वार किया। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
2018 से अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। बचाव पक्ष के वकील ने बताया कि केस में जब गवाही करवाई गई तो शिकायतकर्ता कृष्ण व घायल सुरेश के बयानों में अंतर मिला। इतना ही नहीं, पुलिस ने आरोपियों से एक चाकू बरामद किया था।
फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में बताया गया कि चाकू पर किसी तरह के खून के धब्बे या फिंगर प्रिंट नहीं मिले। इतना ही नहीं, डाॅक्टर ने अपनी गवाही में कहा था कि जो घाव घायल के शरीर पर थे, वे किसी भी धारदार हथियार से हो सकते हैं। यह नहीं कि बरामद चाकू के ही घाव हैं।