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बिना कुछ किए उद्योगों पर लगेगा ताला, नीलामी की नौबत

Sun, 29 Nov 2015 02:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
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सूबे में अपनी औद्योगिक इकाई स्थापित करने की उद्योगपतियों की आस टूट गई है।
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एचएसआईआईडीसी रोहतक में 222 प्लाटाें का आवंटन रद होने के साथ ही उद्योगपतियों की अब आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट है। वहीं से राहत राहत मिल सकती है।

अभी वे कोर्ट के लिखित आदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, इसके बाद अगली रणनीति तैयार होगी।

हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन (एचएसआईआईडीसी) की कमजोरी और उस लगे आरोपों पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के एक निर्णय ने प्रदेश के उद्योग जगत में हलचल पैदा कर दी है।

रोहतक में एसएसआईआईडीसी क्षेत्र में संचालित हो रही 150 के करीब औद्योगिक इकाइयों के संचालकों को समझ नहीं आ रहा कि वे क्या करें। कोर्ट के फैसले के बाद बैठकों का दौर चल रहा है।
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उद्योगपतियों का कहना है कि भले ही उनके प्रति सभी सहानुभूति दिखा रहे हों, लेकिन कानूनी पचडे़ ने उनकी आर्थिक व्यवस्था को हिलाने का पूरा प्रबंध कर दिया है। बगैर कुछ गलती किए उनके उद्योगों को ताला लगेगा और नीलामी होने तक की संभावना बन रही है।

भविष्य में एचएसआईआईडीसी में उद्योग लगाने की नहीं करेंगे गलती
मानसरोवर कॉलोनी स्थित आवास पर रोहतक इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रधान अशोक चौधरी, उप प्रधान अनिल अरोड़ा और सदस्य मोहित बावेजा ने बताया कि वे भविष्य में एचएसआईआईडीसी में उद्योग स्थापित करने की गलती नहीं करेंगे। सरकार विदेशों में जाकर उद्योगपतियों को यहां आने का निमंत्रण देती है, जबकि अपने उद्योगपतियों को बर्बाद करने पर तुली है।

मकान की जमीन को अवैध करार देना और किसी इंडस्ट्री की जमीन को अवैध करार देने में क्या कोई फर्क नहीं है। अब कोर्ट के फैसले के बाद सरकार भी हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अब लड़ाई बैंक और उद्योगपतियों के बीच शुरू होगी। बैंक नियमानुसार अपनी कार्रवाई करेगा और इसका विकल्प किसी उद्योगपति के पास नहीं है।

तीन संगठनों में बंटे उद्योगपतियों को होना होगा एकजुट
तीन संगठनों में बंटे उद्योगपतियों को अब एकजुट होना होगा। शहर में अशोक चौधरी, एस.के. खटोड़ और के.एल. चावला ग्रुप बने हुए हैं। सभी का दावा है कि उनके ग्रुप में अधिक सदस्य हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि तीनों ग्रुप इस चुनौती के लिए एक मंच पर आ सकते हैं।

तो क्या लगेगी प्लाटाें की बोली
प्लांट आवंटन में हुई गड़बड़ी के आरोपों पर कार्रवाई हो चुकी है। विशेषज्ञों की मानें तो अब हुडा के प्लाटों की तरह यहां की जमीनों के लिए खुली बोली होगी। इसमें पूंजीपति वर्ग को स्थान मिल जाएगा और जरूरतमंद या शुरुआत करने वाले उद्योगपतियों को कोई स्थान नहीं मिलेगा।

पति-पत्नी, सगे भाई और मौजिज लोगों ने की थी शिकायत
सूत्रों की मानें तो कोर्ट में शिकायत करने वालों में कोई अन्य नहीं पति-पत्नी, सगे भाई व शहर के मौजिज लोग हैं। घर में किसी एक का प्लाट निकल गया और दूसरे का नहीं निकला तो उसने गड़बड़ी का आरोप जड़ दिया। यहां मंशा यह थी कि सरकार ने एक को प्लाट अलाट कर दिया, जबकि दूसरे को प्लाट देने के लिए विकल्प तलाशती। लेकिन यहां सारी कहानी उल्टी पड़ गई। उद्योगपतियों की मानें तो शिकायत कर्ताओं की यह मंशा बिल्कुल नहीं होगी कि यहां अलाट प्लाट ही रद हो जाएं, क्योंकि उनके अपनों के उद्योग भी अब बंद होने की कगार पर हैं। यहां कुछ लोगों का अधिक लालच और उनकी योजना जिले भर के उद्योग जगत को ले बैठी है।

आवंटन रद होने पर कई उद्योगपतियों में खुशी
कोर्ट के निर्णय पर प्लाटों के आवंटन रद होने पर कई उद्योगपतियों में खुशी भी है। अधिकांश का मानना है कि उनके साथ पहले न्याय नहीं हुआ था। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि अपने चहेतों को उस समय प्लाट दिए गए, जो पहले से मजबूत थे और जिनको जरूरत नहीं थी। एक घर में दो सदस्यों को प्लाट अलाट किए गए। यहां तक कि फैक्टरी के साथ लगते प्लाट भी दिए गए थे। जरूरत से अधिक प्लॉट देने का ही परिणाम है कि आज भी 100 से अधिक प्लॉटों में फैक्ट्री नहीं लगी।
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बोले बैंक अधिकारी
प्लाट आवंटन रद होने के बाद उस प्रापर्टी की कीमत नहीं रह जाती। इसलिए जिस बैंक से उद्योग के लिए लोन लिया गया है वह अपने नियमानुसार कार्रवाई करेगा। इसके लिए संबंधित बैंक के हेडक्वार्टर से विचार-विमर्श हो रहा होगा। यहां मामला और नियम बैंक की पॉलिसी तथा केस टू केस पर डिपेंड होगा। बैंक अपनी रिकवरी के लिए संबंधित व्यक्ति से अन्य संपत्ति का ब्योरा ले सकता है या कोर्ट और डीआरटी जा सकता है।  
- एन.के. बंसल, लीड बैंक आफिसर, पीएनबी






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