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Rohtak News: उपचार की दरकार, मिल रहा इंतजार

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जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर इंतजार करतीं महिलाएं। संवाद
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रोहतक। नागरिक अस्पताल में मरीजों के अल्ट्रासाउंड जांच करवाने की वेटिंग 15 दिन से एक माह की चल रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मरीज एक माह बाद जांच करवागा तो उसका उपचार कब होगा। उस समय तक मरीज की बीमारी कितना बड़ा रूप ले चुकी होगी, कह पाना मुश्किल है। दूसरा विकल्प है कि मरीज निजी जांच केंद्र में मोटी फीस देकर जांच करवाएं।। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लंबी वेटिंग पर मरीजों ने सवाल उठाते हुए कहा है कि विभाग को मरीजों की संख्या के अनुरूप जांच मशीन व डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। एक मशीन लगाने से तो स्पष्ट है कि यह सिर्फ विभाग, मशीन व डॉक्टर की संख्या दिखावा मात्र है। क्योंकि इसका लाभ सीधा मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल में एक मशीन और एक ही डॉक्टर है। इस संबंध में मरीजों ने परेशानी को साझा किया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर को पहले दिखाने, जांच के लिए नंबर लेने के बाद फिर जांच करवाने और बाद में डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाने के लिए अलग-अलग दिन कतारों में लगना पड़ता है।
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ये बोले मरीज

सुबह 6 बजे से अपनी बारी का इंतजार कर रही हूं तब 12 बजे नंबर आया है। एक घंटे से रिपोर्ट का इंतजार कर रही हूं। पहले डेट लेने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है उसके बाद टेस्ट के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है।
- विशाखा, तेज कॉलोनी

मुफ्त इलाज के लिए नागरिक अस्पताल में आते हैं, लेकिन घंटों इंतजार करने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां नंबर नहीं आता और निजी अस्पताल में इलाज बहुत महंगा है। गरीब लोगों के लिए सरकार की स्वास्थ्य सेवाएं बेमानी साबित हो रहीं हैं।
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- शांति, जनता कॉलोनी

अपनी बारी के इंतजार में बैठे-बैठे परेशान हो जाते हैं। बीमारी की वजह से परेशानी को कई घंटों का इंतजार बढ़ा रहा है।
-बेबी

बच्चा स्वस्थ है या नहीं, इसके लिए अल्ट्रसॉउन्ड करवाते हैं। लेकिन इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इतनी भीड़ में न कही बैठने की जगह मिलती है और इंतजार करते-करते सुबह से दोपहर हो जाती है।
- मोना

वक्त पर उपचार न होने की वजह से बीमारी बढ़ती जाती है और बीमारी का पता करने में ही इतने दिन लग जाते हैं। उपचार होने में तो इससे भी ज्यादा समय लगता है। ऐसे में मध्यम वर्ग के लागों के लिए उपचार करवाना मुश्किल होता जा रहा है। गरीब लोग आखिर करे तो क्या करें।
- निकिता

निजी जांच केंद्र में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए एक हजार से अधिक फीस देनी पड़ती है और सरकारी अस्पताल में नंबर ही नहीं आता। अस्पताल प्रशासन व सरकार को इसके लिए अतिरिक्त इंतजाम करना चाहिए। मरीजों की संख्या के अनुरूप ही सुविधा होनी चाहिए।
- नीतू
हमारे पास एक जांच मशीन व एक जांच करने वाली डॉक्टर रितु गोयल हैं। वह प्रतिदिन 80 से 100 अल्ट्रासाउंड जांच कर रही हैं। अतिरिक्त मशीन व डॉक्टर की डिमांड विभाग के अधिकारियों से की गई है। हम मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने में हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
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- डॉ. पुष्पेंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल
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