फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोज 250 इंजेक्शन की जरूरत, सरकार दे रही सिर्फ एक तिहाई

विज्ञापन
विज्ञापन
कुलदीप जांगड़ा
विज्ञापन

हिसार। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस इलाज के उपचार के लिए पोसाकोनाजोल गोली और लाइपोसोनल के इंजेक्शन नहीं मिल पाने के कारण फंगस चौथे स्टेज तक पहुंच रहा है। ऑपरेशन के बाद भी चिकित्सक मरीजों को बचा नहीं पा रहे हैं। जबड़े व आंख का ऑपरेशन हो चुके 5 मरीजों की शुक्रवार को मौत हो गई। अस्पताल में रोजाना 250 इंजेक्शन की लागत है। मांग के हिसाब से केवल 30 प्रतिशत दवा ही मिल पा रही हैं। पिछले दो दिनों से 73 और 67 इंजेक्शन आए हैं।
दवा न मिलने के कारण मरीजों में फंगस चौथी स्टेज तक पहुंच गई थी। जिससे जबड़ा, आंख से लेकर दिमाग में भी गलन शुरू हो गई थी। विशेषज्ञों के मुताबिक पोसाकोनाजोल की गोली व लाइपोसोनल एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन ही ब्लैक फंगस इलाज में कारगर है। पिछले एक महीने से अस्पताल में इस गोली की सप्लाई नहीं आ रही। इस एक गोली की कीमत 300 रुपये है। लाइपोसोनल एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन की कीमत 6 हजार रुपये है। एक मरीज पर एक दिन का 50 हजार रुपये खर्चा आता है। (संवाद)
विज्ञापन

बाहर वाली दवा के आ रहे दुष्प्रभाव
दवा बाहर से खरीदने पर करीब 4 से साढ़े 4 हजार रुपये में मिलती है। इंजेक्शन अलग कंपनी का मिलता है और गोली भी बड़ी मुश्किल से मिलती है। आलम यह है कि इन दवाओं के दुष्प्रभाव भी आ रहे हैं। जैसे कि कंपकंपी के साथ बुखार आना, बीपी कम होना आदि। वैसे गोली तो ठीक है, पर इंजेक्शन इतने कारगर नहीं है। जितनी सरकार सप्लाई में आने वाला इंजेक्शन कारगर है।
सरकार से आ चुके 2260 इंजेक्शन
प्रदेश सरकार की ओर से अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में अब तक कुल 2260 इंजेक्शन आ चुके हैं। मेडिकल कॉलेज ने खुद भी एक हजार इंजेक्शन खरीदे हैं। यह एक हजार इंजेक्शन भी खत्म हो गए तो मेडिकल कॉलेज ने फिर से दवा खरीदी। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से हर रोज मरीजों की डिटेल ली जा रही है। इसके बाद भी आज तक एक भी दिन जरूरत के मुताबिक पूरी मात्रा में इंजेक्शन नहीं आए। ब्लैक फंगस के मरीज को उसके वजन के अनुसार इंजेक्शन देते हैं। 50 किलो वजन पर 5 टीके और 70 किलो वाले को 7 इंजेक्शन रोजाना लगाने पड़ते हैं।
एक सप्ताह तक इंजेक्शन व गोली मिलना जरूरी
ऑपरेशन के बाद मरीज को करीब एक सप्ताह तक समय पर इंजेक्शन और गोली मिलना जरूरी है। इसके बाद हालत में सुधार देखकर डोज कम की जाती है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी 6 माह तक इलाज लेना जरूरी है। इसके लिए गोली लेना अनिवार्य है।
अब तक की ये है ब्लैक फंगस की स्थिति
ब्लैक फंगस के कुल केस आए - 309
कुल मौत - 85
मरीजों के ऑपरेशन हो चुके - 288
मरीजों के जबड़े निकाले गए - 26
मरीजों की आंखें निकाली गईं - 12
स्वस्थ हो चुके मरीज, जिनका चल रहा इलाज - 120
मेडिकल कॉलेज में दाखिल - 60
ठीक हुए मरीजों की पीड़ा भी कहीं अधिक
ब्लैक फंगस से ठीक होने की स्थिति में शामिल करीब 70 मरीज ज्यादा तकलीफ में हैं। 38 मरीजों ने अपने जबड़े और आंख आदि अंग गवां दिए हैं।
शुक्रवार को ब्लैक फंगस से 5 मरीज की मौत हुई है। इनमें से तीन मरीजों के जबड़े व आंख-नाक के ऑपरेशन हो चुके थे। तीनों में चौथी स्टेज तक फंगस पहुंच गया था। जिस कारण गलन शुरू हो गई। दवा की कमी शुरू से ही है। सरकार से आने वाली दवा अच्छी है, लेकिन कम मात्रा में आ रही है। गोली भी महीने से नहीं आ रही है।
विज्ञापन

- डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफेसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा
पीजीआई में 199 मरीजों के लिए रोज 1000 इंजेक्शन की जरूरत, मिले 253
पीजीआईएमएस में ब्लैक फंगस के 199 रोगियों का उपचार चल रहा है। हर रोगी को रोज पांच से छह इंजेक्शन की जरूरत है, ऐसे में इन्हें करीब 1000 इंजेक्शन चाहिए। कम उपलब्धता के कारण रोगियों को इंजेक्शन की एक या दो डोज लगा दी जाती है। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गजेंद्र सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस के 12 मरीजों का ऑपरेशन किया गया। शुक्रवार को इन रोगियों के लिए 253 इंजेक्शन मिले, जो लगा दिए गए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें