रोहतक। नशे के फैलते जाल को काटने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में पहली बार नेशनल ड्रग यूज सर्वे के तहत नशा करने वालों का डाटा जुटाने की तैयारी है। इसके लिए पीजीआई व एम्स में एमओयू किया गया है। सर्वे में प्राप्त आंकड़ाें के आधार पर सरकार नशे के विरुद्ध बड़ा युद्ध शुरू कर सकती है।
हरियाणा में सर्वे की जिम्मेदारी पीजीआई के राज्य व्यसन निर्भरता उपचार केंद्र (नशा मुक्ति केंद्र) को दी गई है। प्रदेश में नशे को लेकर दो महीने में सर्वे शुरू होना है। इसके तहत राज्य में किस तरह का नशा, कितना व किन उम्र के लोगों में नशा फैल रहा है, यह जानने का प्रयास किया जाएगा।
नशा मुक्ति केंद्र में कार्यरत मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर एवं प्राइमरी इनवेस्टीगेटर डॉ. सिद्धार्थ आर्य ने बताया कि सर्वे को लेकर एमओयू हो गया है। एम्स की ओर से चिकित्सकों को ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाएगा।
इसमें चिकित्सकों को सर्वे से संबंधित जानकारी व तरीका बताया जाएगा। राज्य में सर्वे के लिए उपचार केंद्र की ओर से काउंसलरों की ड्यूटी भी लगाई जाएगी। पीजीआई के नशा मुक्ति केंद्र में हफ्ते में तीन दिन लगने वाली ओपीडी में 40 से 45 नए नशे के मरीज पहुंचते हैं।
राज्य सरकार की ओर से केंद्र को 2017 में किया गया अपग्रेड
केंद्र को 2017 में अपग्रेड किया गया था। अपग्रेड होने के बाद यहां मेडिकल ऑफिसर एमओ, नर्सिंग अधिकारियों व अन्य नियुक्तियां की गई। नशा मुक्ति केंद्र में एम्स के सहयोग से ड्रग ट्रीटमेंट क्लीनिक (डीटीसी) शुरू किया गया। इसमें मरीजों को नशा छुड़ाने के लिए निशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह प्रदेश का सरकारी नशा मुक्ति केंद्र है जहां नशे के मरीजों के लिए हर तरह की निशुल्क दवाइयां उपलब्ध हैं। इसके बाद से ही नशा मुक्ति केंद्र को अपग्रेड करने का प्रयास किया जा रहा है।
6-एसोसिएट प्रोफेसर व प्राइमरी इनवेस्टीगेटर डॉ. सिद्धार्थ आर्य