माई सिटी रिपोर्टर
रोहतक। राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी (17) की प्रैक्टिस के दौरान पोल गिरने से मौत के लिए पिता संदीप राठी ने प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। बिलखते हुए बोले-जर्जर पोल ठीक करा देते तो बेटे की जान नहीं जाती। मेरा बेटा नहीं, जिंदगी चली गई है।
लाखनमाजरा निवासी हार्दिक की मौत ने परिवार के साथ खेल बिरादरी को भी झकझोर दिया है। घर में दुख जताने वाले लोगों के बीच घिरे पिता संदीप राठी कभी आंसू पोछते हैं, कभी कुछ बुदबुदाने लगते हैं। हार्दिक की मां का बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। घर-परिवार के लोग किसी तरह उन्हें संभाल रहे हैं।
डबडबाई आंखों से संदीप बताते हैं कि बेटा रोज 10-10 घंटे प्रैक्टिस करता था। वह देश का नाम रोशन करना चाहता था। गांव में सरकारी खेल सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं है। हम लोग खुद ही सबकुछ मैनेज कर रहे हैं ताकि खिलाड़ी आगे बढ़ सकें।
बोले...बेटा बास्केटबॉल का शानदार खिलाड़ी था। कहता था, मुझे अपना नहीं, देश का नाम रोशन करने के लिए खेलना है। वह इसके लिए अटूट मेहनत करता था। कहता था, पापा जो कोई नहीं कर पाया, वह करके दिखाऊंगा। आपको ऐसी जगह लेकर जाऊंगा कि पूरा देश कहेगा ये हार्दिक के पापा हैं।
पिता ने बताया कि वह सिर्फ अपनी नहीं, सभी छोटे-बड़े खिलाड़ियों की चिंता करता था। सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की बात सोचता था। उससे कोच ने या साथियों ने जो कुछ कहा, उसने कभी इन्कार नहीं किया। वह जी-तोड़ मेहनत कर रहा था।
बिलखते हुए पिता ने कहा, स्टेडियम में मेरे बेटे की मौत के लिए प्रशासन जिम्मेदार है। समय रहते जर्जर पोल की मरम्मत करा दी जाती तो शायद उसकी जान बच जाती। उन्होंने कहा, स्टेडियम में खेल सुविधाओं का यहां बुरा हाल है। भवन तक जर्जर है।
उन्होंने कहा कि हमारे साथ जो घटा है, वह किसी और के साथ न हो। जो लोग इसके जिम्मेदार हैं, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो खिलाड़ी ऐसे ही दम तोड़ते रहेंगे। इससे देश को अच्छे खिलाड़ी भी नहीं मिलेंगे।
25 साल पहले बना था खेल मैदान...सुविधाएं जुटा रहे जेब से : कोच
रोहतक। बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी के कोच राजकुमार उर्फ रिंकू राठी अपने लाजवाब शिष्य के निधन से बेहद आहत हैं। गुस्से से भरे होकर बताते हैं कि इस खेल मैदान को बने करीब 25 साल हो गए हैं। यहीं पर गांव के 50 से ज्यादा कबड्डी और बास्केटबॉल के खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। उभरती खेल प्रतिभाओं के बावजूद यहां खेल विभाग, पंचायत या सरकार की ओर से किसी तरह की सुविधा नहीं दी जा सकी। जो-जैसी और जितनी भी व्यवस्था हो सकी है, उसे मिलकर गांव वालों ने ही किया है। हालत यह है कि धूप, बारिश व सर्दी से बचाव के लिए शेड तक की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा-वीआईपी आते हैं, वादे करते हैं और चले जाते हैं। पूर्व विधायक बलराज कुंडू ने स्टेडियम में शेड लगवाने का वादा किया था लेकिन बना अभी तक नहीं। वर्ष 2019 में एक बोर्ड जरूर लगा लेकिन उसके आगे कोई काम नहीं हुआ। यहां कोच, मैदान का रखरखाव और खेल की चीजों का खर्च लोग खुद ही उठा रहे हैं। संवाद
कुंडू बोले- मैंने नहीं किया था शेड का वादा, मौजूदा विधायक से पूछें
विधायक रहते समय मैं सत्ता पक्ष नहीं विपक्ष में था। फिर भी हर संभव विकास कार्य करवाए। विधायक के तौर पर लाखनमाजरा के स्टेडियम में शेड लगवाने की कोई घोषणा नहीं की थी। साथ ही, ग्रामीणों को मौजूदा विधायक से भी पूछना चाहिए कि अब तक कितने विकास कार्य करवाए हैं।
- बलराज कुंडू, पूर्व विधायक महम
मैदान में सबका चहेता था हार्दिक
हार्दिक सबका चहेता खिलाड़ी था। अपने शानदार प्रदर्शन के बूते उसने तीन बार सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप खेली। एक बार नेशनल यूथ चैंपियनशिप का भी हिस्सेदार बना। इसी प्रदर्शन के दम पर उसका चयन नेशनल बास्केटबॉल अकादमी इंदौर के लिए हो चुका था। हरियाणा में सिर्फ दो ही खिलाड़ी इस अकादमी के लिए चुने गए हैं। यहीं पर उसके आगे के हुनर की तराशी होनी थी। लेकिन, इसके पहले ही सिस्टम की ढिलाई से बास्केटबॉल के एक उदीयमान सितारे का अस्त हो गया।