दोनों प्रापर्टी आईडी और नक्शे अलग-अलग नाम से जारी किये गये
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नगर निगम में प्रापर्टी के संबंध में खूब फर्जीवाड़ा सामने आ रहा है। अब एक नया मामला सामने आया है। एक प्लाट के दो अलग-अलग नामों से दो नक्शे और दो आईडी जारी की गई है। मामला ज्वाइंट कमिश्नर के सामने आया तो उन्होंने एक पक्ष को बुलाकर पूछताछ की। उसने प्लाट अशोक काका के भाई से खरीदने की बात कही और संबंधित कागजात दिखाए। मामले में ज्वाइंट कमिश्नर ने एटीपी को जांच करने के लिए कहा है।
मोहल्ला महाजन पड़ाव में रहने वाले कृष्ण गर्ग और उनकी पत्नी निशा ने 14 अगस्त 2014 को 75 वर्ग गज के प्लाट की नगर निगम से आईडी लेकर नक्शा पास कराने के लिए आवेदन किया। उनका आवेदन 17 नवंबर को अस्वीकृत कर दिया गया। इसके बाद 20 जुलाई 2015 को फाइल दोबारा लगाई गई, जिस पर 28 मार्च को नक्शा पास कर दिया गया। उसी प्लाट पर मकान का नक्शा पास कराने के लिए वीरेंद्र की ओर से 4 दिसंबर 2015 को आवेदन किया गया। लेकिन वह आवेदन 146.70 वर्ग गज का था, जिसे 14 दिसंबर को पास किया गया। इसका निरीक्षण किया गया तो पता चला कि दोनों नक्शे पास होने की जगह एक ही है। जिस पर ज्वाइंट कमिश्नर अजय चोपड़ा की ओर से नोटिस भेजा गया। कृष्ण गर्ग सोमवार को ज्वाइंट कमिश्नर के सामने पेश हुए। उन्होंने अपने सबूत ज्वाइंट कमिश्नर को दिखाए। कृष्ण गर्ग ने बताया कि उन्होंने मकान अशोक काका के भाई गोपाल वर्मा से खरीदा था। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के अभिलेखों से साफ है कि उस प्लाट का पहले उनके नाम से नक्शा पास हुआ है, जिसकी आईडी को डिलीट करके दूसरी आईडी जारी की गई। उन्होंने बताया कि जिस 146.70 वर्ग गज का नक्शा पास किया गया है, उसमें से आधा विधवा महिला कृष्णा के पास है। उनके और कृष्णा के प्लाट को एक करके बाद में नक्शा पास कराया गया है। मामले में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। ज्वाइंट कमिश्नर ने जांच बैठा दी है।
मामले में अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि प्लाट किसका है। यह जांच के बाद ही पता चलेगा। यह जरूर है कि एक ही प्लाट की दो आईडी और दो नक्शे जारी किये गये हैं, जिसकी जांच एटीपी को सौंपी गई है। मामले में जिसकी भी मिलीभगत मिलेगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अजय चोपड़ा, ज्वाइंट कमिश्नर नगर निगम