रोहतक। धर्म चक्र प्रवर्तन के 146वें अध्याय में समर्थगुरु सिद्धार्थ ने ऑनलाइन बोलते हुए शब्द ज्ञान पर प्रकाश डाला। शिवदयाल महाराज का उदाहरण देते हुए समर्थगुरु ने कहा कि शब्द बिना सब थोथा ज्ञान, शब्द बिना सब थोथा ध्यान, शब्द मत छोड़ अरे अजान, राधा स्वामी करे बखान। हमारी आत्मा में विराजमान नाद, नूर और निराकार के संगम को समर्थगुरु ने शब्द कहा। इस अवसर पर आचार्य डॉक्टर नरेश ज्योति, नितिन, सेंटर कोऑर्डिनेटर आचार्य दर्शन, वंदना, सविता, इंदिरा भार्गव व अन्य साधक ऑनलाइन जुड़े।