मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहती हूं, लेकिन पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पा रही हूं। मुझे क्या करना चाहिए सर...? मेरे घर वाले मेरी शादी करना चाहते हैं, लेकिन मैं पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं, आप प्लीज मेरे घर वालों को समझाएं मैडम...। परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन ऑनलाइन स्टडी के चलते मेरी तैयारी अच्छे से नहीं हो पाई, मैं क्या करूं समझ नहीं आ रहा...। मैं घर के माहौल से परेशान हूं, मन करता है कहीं भाग जाऊं, क्योंकि पापा मम्मी और मुझे गालियां देते हैं, मेरे भाई पर केस चल रहा हैं, मुझे क्या करना चाहिए ? इन दिनों नई दिशा हेल्पलाइन पर छात्र इसी तरह से अपना दर्द बयां कर रहे हैं।
एक्सपर्ट भी इनके मन के हर सवाल व दर्द को समझते हुए मनोचिकित्सा के जरिए जवाब देकर हर संभव सहायता करने की कोशिश करते हैं। उच्च शिक्षा विभाग हरियाणा की तरफ से दो महीने पहले नई दिशा हेल्पलाइन शुरू की गई थी। इसके जरिए कॉलेज के विद्यार्थी मानसिक परेशानी के जरिये फोन पर बात करके सहायक मनोवैज्ञानिकों से सहायता मांगते हैं। इस हेल्पलाइन पर 24 घंटे प्रदेश भर के 40 मनोवैज्ञानिक विद्यार्थियों की सहायता के लिए उपलब्ध रहते हैं। एक मनोवैज्ञानिक दिन में दो घंटे तक फोन कॉल्स अटैंड करता है। विद्यार्थियों की प्रत्येक कॉल को गोपनीय रखा जाता है। अमर उजाला टीम ने महम व रोहतक के राजकीय महाविद्यालयों के नई दिशा में जुड़े मनोवैज्ञानिकों से बातचीत की व जाना कि उनके पास किस तरह की समस्याओं के लिए विद्यार्थी फोन करते हैं।
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महामारी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाला है। विद्यार्थियों की ज्यादातर कॉल पढ़ाई, परीक्षा व घर के माहौल से संबंधित आती हैं। इन दिनों विद्यार्थी डिप्रेशन, चिंता व तनाव से गुजर रहे हैं। अभिभावक भी कम परेशान नहीं हैं। पढ़ाई के मामलों से अलग कुछ कॉल्स ऐसी भी आती हैं, जिनमें बच्चे अपनी व्यक्तिगत समस्याएं भी बताते हैं। ऐसे मामलों में हम उन्हें परामर्श देकर हर संभव मदद करने की कोशिश करते हैं। साथ ही योगा व मेडिटेशन की सलाह भी देते हैं।
-डॉ. अनीता, सहायक प्राध्यापक, पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज रोहतक
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विद्यार्थियों के सोशल मीडिया एडिक्शन, परीक्षाओं की वजह से तनाव आदि के कॉल्स आती हैं। इसके अलावा व्यक्तिगत परेशानियों के चलते मानसिक तनाव की वजह से भी विद्यार्थी व अभिभावक फोन कर लेते हैं। ऐसे में हम उन्हें संयम रखने, गुस्से पर कंट्रोल, अच्छे कामों को डायरी में लिखने की सलाह देते हैं। इसी के साथ शेयरिंग भी अच्छी थैरेपी की तरह काम करता है। विद्यार्थियों को घर के बुजुर्गों या अपने विश्वासपात्र प्रियजन से विचार साझा करने के लिए कहते हैं।
-डॉ. दिनेश सिंह, सहायक प्राध्यापक, राजकीय महाविद्यालय महम
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मनोवैज्ञानिकों के पास आ रहे इस तरह के केस
केस नंबर-1
सवाल: मैं घर के माहौल से परेशान हूं, मन करता हैं कहीं भाग जाऊं, क्योंकि पापा मम्मी मुझे गालियां देते हैं, मेरे भाई पर केस चल रहा है, मुझे क्या करना चाहिए मैडम...?
जवाब: आपसी दूरियां खत्म करो। शेयरिंग सबसे ज्यादा जरूरी है। मम्मी-पापा से बातचीत करो। इस वक्त उन्हें आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है। भाई पर केस चल रहा है, तो पिता उनकी वजह से भी मानसिक तनाव में होंगे। उन्हें विश्वास में लो। योगा और मेडिटेशन किया करो।
केस नंबर-2
सवाल: मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहती हूं, लेकिन पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पा रहा हूं। मुझे क्या करना चाहिए सर...?
जवाब: पढ़ाई में ध्यान क्यों नहीं लग पाता, क्या घर का माहौल ठीक नहीं है? मोबाइल कितने समय तक इस्तेमाल करती हो, हर मैसेज का जवाब देती हो तो धीरे-धीरे आदत डालो मोबाइल डेटा बंद करने की। पहले 10 मिनट बंद करो और फोन को दूर रखो। धीरे-धीरे समय को एक घंटे से दो और चार घंटे में बदल दो। इसी के साथ 10 मिनट से शुरू करके पढ़ने की भी आदत डालो।
केस नंबर-3
सवाल: मेरे घर वाले मेरी शादी करना चाहते हैं, लेकिन मैं पढ़-लिखकर पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं, आप प्लीज मेरे घर वालों को समझाएं ?
जवाब: मम्मी-पापा इतनी जल्दी क्यों शादी करना चाहते हैं, कारण पता करो। अभिभावकों को विश्वास में लो और जरूरत पड़े तो हमसे बातचीत कराओ। करियर का गोल सेट करो और पूरे मन से तैयारी करो।
केस नंबर-4
सवाल: परीक्षाएं नजदीक हैं, लेकिन ऑनलाइन स्टडी के चलते मेरी तैयारी अच्छे से नहीं हो पाई, मैं क्या करूं समझ नहीं आ रहा?
जवाब: एकाग्रता बनाएं और परीक्षाओं की अच्छे से तैयारी करें। तनाव दूर करने के लिए एक्सरसाइज, योगा व मेडिटेशन करें। समय निकाल कर अपनी पसंद का काम करें तो रिलैक्स मिलेगा।