जिले में मंगलवार शाम तक करीब 30 हजार एकड़ खेतीबाड़ी रकबा पंजीकृत हो गया। लेकिन अभी भी एक लाख एकड़ से ज्यादा रकबा ऐसा है, जिसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। किसानों की मांग पर राज्य सरकार ने मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल 5-6 अप्रैल को खोला था। लेकिन जिन्होंने अब भी फसल का पंजीकरण नहीं करवाया है, वे मंडी में एमएसपी पर फसल नहीं बेच सकेंगे। खबर लिखे जाने तक सरकार की ओर से पोर्टल खुलने की अवधि बढ़ाने की कोई सूचना नहीं आई थी।
राज्य सरकार ने अब फसलें बेचने के लिए मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसानों को सरकारी स्कीमों का लाभ भी पंजीकरण करवाने पर ही मिलेगा। वहीं 20 मार्च 2021 को पोर्टल बंद कर दिया गया था। तब तक करीब 1.65 लाख एकड़ रकबे का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जबकि जिले में कुल खेतीबाड़ी रकबा 3.12 लाख एकड़ है। खेतीबाड़ी विभाग के अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 96 हजार किसान परिवार हैं। पर 20 मार्च तक सिर्फ 25721 किसानों ने ही अपनी फसलों का रजिस्ट्रेशन करवाया था। राज्य भर से ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि बड़ी संख्या में किसान वंचित रह गए हैं। तब सरकार ने 5-6 अप्रैल को मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल खोलने की घोषणा की थी। हालांकि, पोर्टल चार अप्रैल की शाम को ही खुल गया था। खेतीबाड़ी विभाग के अनुसार पांच अप्रैल से छह अप्रैल के शाम पांच बजे तक करीब 30 हजार रकबे का पंजीकरण हुआ है। वहीं, रजिस्ट्रेशन करवाने वाले किसानों की संख्या लगभग 500 है। इस तरह अभी एक लाख से ज्यादा रकबा ऐसा है जिसका पंजीकरण नहीं हुआ है। इसमें गन्ना, हरा चारा, सब्जियां भी शामिल हैं।
छह अप्रैल को शाम पांच बजे तक 30782 किसानों ने 195440.75 एकड़ खेतीबाड़ी रकबे की फसलों का पंजीकरण करवाया है। सरकार की ओर से छह अप्रैल के बाद पोर्टल खोलने को लेकर अभी कोई निर्देश नहीं आया है। जिन किसानों ने अब भी मेरी फसल, मेरा ब्योरा पर पंजीकरण नहीं करवाया है, वे मंडी में एमएसपी पर फसल नहीं बेच सकेंगे।
- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग