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मुफ्त बीज देने के बाद भी नहीं बढ़ा सरसों का रकबा

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खेतीबाड़ी विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी इस सीजन में सरसों का रकबा नहीं बढ़ सका। मुफ्त बीज बांटने के बावजूद सरसों का रकबा पिछले साल जितना ही रहा है। जिले में सरसों की बिजाई खत्म हो चुकी है।
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पिछले साल जिले में सरसों का रकबा 11 हजार हेक्टेयर था। कृषि विभाग ने इस साल इसे बढ़ा कर 14 हजार हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन विभाग नाकाम रहा, इस साल भी रकबा 11 हजार हेक्टेयर ही रह गया। दरसल केंद्र सरकार ने खाद्य तेलों का आयात घटाने के लिए देश भर में तिलहन फसलों को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई थी। सरकार का मानना था कि अगर तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ जाए तो खाद्य तेलों का उत्पादन भी अपने आप बढ़ जाएगा। केंद्र सरकार ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 4425 से बढ़ा कर 4650 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था। रोहतक जिले में तिलहन फसलों में सिर्फ सरसों ही होती है। केंद्र सरकार की स्कीम के तहत खेतीबाड़ी विभाग ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरसों की पांच लेटेस्ट वैराइटी के बीज किसानों को मुफ्त बांटे थे। जिसके लिए दो-दो किलो की मिनी किट तैयार की गई थीं। एक मिनी किट में एक एकड़ रकबे के लिए पर्याप्त बीज थे। जिले भर में 8400 मिनी किट किसानों को मुफ्त बांटी गई थीं। जोकि 8400 एकड़ या 3360 हेक्टेयर रकबे को कवर करने को पर्याप्त थीं। खेतीबाड़ी विभाग ने किसानों को यह समझाने की भी कोशिश की कि गेहूं की तुलना में सरसों की पैदावार में लागत काफी कम है। गेहूं की फसल को चार बार पानी देने की जरूरत पड़ती है। पर सरसों अगर बारिश अच्छी हुई तो एक ही पानी से काम चल जाता है। वरना दो बार पानी तो बिल्कुल पर्याप्त है। गेहूं की तुलना में सरसों में खाद भी कम लगती है। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी गेहूं वाले किसान सरसों की तरफ शिफ्ट नहीं हो सके।
केंद्र सरकार की योजना के तहत जिले में सरसों का रकबा करीब चार हजार हेक्टेयर बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था। जिसके लिए 8400 एकड़ रकबे के लिए पर्याप्त बीज मुफ्त बांटे गए थे। लेकिन सरसों का रकबा बढ़ नहीं सका। हालांकि किसानों को नई वैराइटी के बीज उपयोग करने से फायदा जरूर हुआ है।
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- डॉ. रोहताश सिंह, उप निदेशक, कृषि विभाग।
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