रोहतक। संघर्ष व मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। हर्ष गुप्ता ने सीए बनकर यह साबित कर दिया है, साथ ही अपनी मां की मेहनत को भी साकार करने का काम किया है। बेटे की सफलता पर मां राधा गुप्ता भी खुशी से सराबोर हैं। अमर उजाला ने हर्ष से उसकी सफलता को लेकर बातचीत की तो उसने अपना संघर्ष व मां की मेहनत का दर्द साझा किया।
शीला बाईपास निवासी हर्ष गुप्ता ने बताया कि पिता अरुण गुप्ता का निधन हो चुका है। मां राधा गुप्ता ने हम दो भाइयों को बड़ी मुश्किलों से पाला है। भाई आयात-निर्यात का व्यापार करते हैं। मां सिलाई करती हैं। मेरी मां ही मेरी रोल मॉडल, हीरो, सबकुछ है। सारा संघर्ष मेरी मां का है। मां ने खुद भले अपने लिए कुछ नया न लिया हो, मगर हम दोनों भाइयों को किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी।
वर्ष 2019 में सीए की तैयारी शुरू की थी। इसके बाद से प्रयास जारी रहा। अब पहली ही बार में सफलता हासिल की। अपनी मां को हर सुख दे सकूं, इसलिए इतनी मेहनत की और सीए बना। अब मां के कुछ करना है।
सीए बनने का ऐसा जुनून... बहन की शादी छोड़ पड़ोसी के घर जाकर की पढ़ाई
रोहतक। सीए बनना था। इसके लिए दिन रात मेहनत की। रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई में ही बीते। खेल, टीवी, सोशल मीडिया या दोस्त तो दूर अपनी बहन की शादी तक में मुश्किल से दो घंटे गया था। घर में शादी का माहौल था। इसलिए पड़ोस के घर में जाकर पढ़ाई की। रात को सभी संगीत में झूमे तो मेरी पढ़ाई जारी रहती। रात को पढ़ते हुए थक जाता तो पड़ोसी के घर में ही सो जाता। यह कहना है सीए बने अनुभव गरसा का। अमर उजाला ने इस चयन को लेकर बातचीत की तो इन्होंने अपना अनुभव व संघर्ष साझा किया।
अनुभव ने बताया कि पिता सुरेश गरसा सेवानिवृत्त प्राचार्य हैं। मां ऊषा गरसा गृहिणी हैं। सीए के लिए जरूरी तीन साल की इंटरशिप गुरुग्राम से की। इस दौरान दिन रात काम किया। यह अनुभव भी हमेशा याद रहेगा। ब्यूरो
सीए बनने के लिए परिवार व दोस्तों से बनाई दूरी
रोहतक। मुझे सीए बनना था। इसमें काफी मेहनत लगी। इससे ज्यादा त्याग करना पड़ा। अपनी छोटी-छोटी खुशियों व आराम के अलावा परिवार व दोस्तों तक से दूरी बनानी पड़़ी। भाई की शादी में भी थोड़ी देर के लिए ही शामिल हुआ। अब जाकर मेहनत व त्याग सफल हुआ। इस सफलता से पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह कहना है घनीपुरा निवासी नीरज सिंगल का। सीए बन इस युवा से अमर उजाला ने बातचीत की तो इसका संघर्ष सामने आया।
नीरज सिंगल ने कहा कि सीए बनने का सपना था। पहली बार में ही परीक्षा पास कर यह सपना पूरा कर पाया हूं। कक्षा 12वीं में कॉमर्स संकाय चुना था। इसमें भविष्य को लेकर शिक्षकों व अन्य लोगों से बातचीत की तो सभी ने सीए बनने की सलाह दी। यही सबसे बेहतर विकल्प था। इसके चलते सबकुछ छोड़कर पढ़ाई में जुट गया। गुरुग्राम में तीन साल दिन रात मेहनत की। पढ़ाई के लिए केवल छुट्टी का दिन मिलता था। यह दिन परिवार या दोस्तों के साथ न बिताकर किताबों में ध्यान लगाया। इसके चलते सफल हो पाया हूं।