वर्तमान युग में महिला वर्ग शक्तिशाली है। उन्हें परिवार का सहयोग मिला रहा है। समाज से पहले परिवार का सहयोग अनिवार्य है। महिलाएं पढ़ लिखकर सबला बन रही हैं। खुद को सशक्त और आत्मनिर्भर बना रही है। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आईएमटी कार्यालय में महिला दिवस के उपलक्ष्य में अपराजिता के तहत सिर्फ घर नहीं, सारा जहां हमारा, विषय पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने बेबाकी से अपनी बात रखी। यहां सभी ने समाज को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने पर चर्चा करते हुए सभी को एक परिवार की तरह सोचने की आवश्यकता जताई।
महिला सभी क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे में समाज उनके लिए सुरक्षित हो जाए तो एक नई सफलता की लहर देखने को मिल सकती है। समाज को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाना ही समाज की जरूरत है। इसमें सभी का सहयोग अनिवार्य है।
- जगमती सांगवान, प्रधान, जनवादी महिला समिति।
समाज में महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता है। महिला दिवस महिलाओं की आजादी और उनके अधिकारियों के प्रति जागरूकता का दिन है। वर्तमान समय में नैतिकता होना अनिवार्य है। बच्चों को शिक्षित किया जाए। समाज बदलना है तो सोच में भी बदलाव लाना होगा।
- रुपांशी हुड्डा, कोऑर्डिनेटर, निपुण हरियाणा
समाज में बेटी को आगे बढ़ाना है तो सबसे पहले सोच में बदलाव करना होगा। परिवार के सहयोग से ही खुद खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंची। समाज की हर महिला को परिवार का इसी तरह सहयोग मिले। इससे दूसरी बेटियां भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित होंगी।
- पूजा मोर, एथलीट।
जीवन में परिवार का सहयोग जिस भी महिला को मिला है, वह सफल है। इसमें पिता का सहयोग अनिवार्य है। एक शिक्षित महिला एक से अधिक परिवार को शिक्षित करती है। इसके लिए माता-पिता का शिक्षित होना आवश्यक है।
- डॉ. सुनीता शर्मा, प्राचार्य, एसआर कॉलेज।
जीवन में कोई मुकाम हासिल करना आसान नहीं होता, मगर समाज में महिलाओं से अपेक्षाएं ज्यादा रखी जाती हैं। समाज में जब बेटा-बेटी में भेदभाव खत्म होगा, तभी विस्तार की शुरुआत होगी। शिक्षित युवा ही सुरक्षित समाज बनाने में सक्षम हो सकता है।
- डॉ. शबनम राठी, प्राचार्य, जाट कॉलेज।
मां के लिए बेटा-बेटी में फर्क नहीं होता है। इसी तरह समाज में भी महिला-पुरुष में भी फर्क नहीं होना चाहिए। परिवार में बच्चों को शिक्षित किया जाए। इससे वे समाज के हित में फैसले लेने में सक्षम रहेंगे।
- दीपिका, मनोविज्ञान शिक्षिका।