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मानसून सिर पर... छह किलोमीटर में 40 से अधिक गड्ढे

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जन सुविधा के लिए किया गया कार्य यदि लापरवाही की भेंट चढे़ तो वह सुविधा देने के स्थान पर जानलेवा भी हो सकता है। शहर के छह किलोमीटर के सफर में 40 से अधिक गड्ढे बने हैं, जो जानलेवा साबित हो सकते हैं। इन गड्ढों के समीप न तो कोई संकेतक है और न ही अभी ऐसा कोई इंतजाम करने की तैयारी है।
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अमर उजाला की टीम ने शनिवार को मानसून से पहले शहर की सड़कों का हाल जानने के लिए छह किलोमीटर का सफर तय किया। इसमें 40 से अधिक गड्ढे मिले। ये वे गड्ढे हैं, जो बारिश के दौरान दिखाई नहीं देंगे और इनमें पैदल व दोपहिया वाहन चालकों के गिरने का अंदेशा बना है। सड़क से लेकर गलियों तक हर स्थान पर कहीं छोटा तो कहीं बड़ा गड्ढा है। इसमें कुछ पेयजल लाइन को सही करने के लिए तो कहीं सीवर लाइन ठीक करने के लिए खोदे गए हैं। इसके अलावा सीएनजी की बड़ी पाइपलाइन बिछाने के लिए भी गड्ढे खोदे गए हैं। नियमानुसार किसी भी विभाग को गड्ढा खोदने से पहले पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग से अनुमति लेनी होती है। काम समाप्त करने के बाद गड्ढे को भरकर रिपेयर करना होता है, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं होता। स्थिति यह है कि इस गड्ढों में आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्गों के लिए ये गड्ढे अधिक समस्या बने हैं।
झज्जर चुंगी से सुनारिया बाईपास तक तीन गड्ढे
झज्जर चुंगी से लेकर सुनारिया बाईपास तक 1200 मीटर के रास्ते में तीन बडे़ गड्ढे बने हुए हैं। इनमें पिछले एक माह में दस से ज्यादा हादसे हो चुके हैं। सुनारिया बाईपास निवासी राजेश गोयल ने बताया कि दस से अधिक वाहन चालकों को यहां चोट लग चुकी है। कई महिलाएं गंभीर रूप से घायल हुई हैं। संबंधित विभाग को शिकायत देने के बाद भी इन गड्ढों को भरा नहीं जाता है।
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दुर्गा कॉलोनी में छह माह से नहीं भरा गड्ढा
दुर्गा कॉलोनी में पिछले छह माह पहले एक गड्डा खोदा गया था, जो आज तक नहीं भरा गया है। यहां दस से ज्यादा बार गड्ढा खोदा जा चुका है, लेकिन पब्लिक हेल्थ विभाग दूषित पेयजल की समस्या का समाधान नहीं कर पाया है। हर बार इसे ठीक से भरा नहीं जाता। इसमें पिछले दस दिन से पानी भरा है। सोनीपत स्टैंड से नए बस स्टैंड की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग में इसके चलते जाम की स्थिति बनी रहती है।
वीवीआईपी कॉलोनी भी अछूती नहीं
विधायक, पूर्व विधायक, राज्यसभा सांसद, पूर्व मंत्री के निवास स्थल वाली डीएलएफ कॉलोनी भी गड्ढों की समस्या से अछूती नहीं है। यहां दो से ढाई फुट के गहरे गड्ढे हैं। इनको पिछले तीन माह से नहीं भरा गया है। डीएलएफ की मेन सड़क पर इंटरलॉकिंग टाइल वाली गली ही जमीन में धंस गई है। इसके साथ लगती सड़क पर गड्डा बना है, इसमें पानी भरा हुआ है। नगर निगम को शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
नेकी राम कॉलेज के सामने खोदी लंबी सड़क
पावर हाउस नेकी राम कॉलेज के सामने पब्लिक हेल्थ विभाग ने पाइप लीके ज ठीक करने के लिए सड़क को लंबाई में गहरा गड्डा खोदा, लेकिन दस दिन बाद भी इसे सही नहीं किया जा रहा है। सड़क पर गड्ढों के किनारे चिकनी मिट्टी डली है, जोकि बारिश में अधिक खतरनाक हो जाती है। गड्ढा पानी में दिखाई नहीं देता और चिकनी मिट्टी इसमें वाहन चालकों को गिरा देती है। यहां कई बाइक व स्कूटी सवार चोटिल हो रहे हैं।
दिल्ली बाईपास से जाट भवन तक राह ठीक नहीं
दिल्ली बाईपास से जाट भवन तक सफर करना भी खतरे से खाली नहीं है। यहां पाइप दबाने के नाम पर सड़क को खोदा गया है। दिल्ली की तरफ जा रहा रोड काफी व्यस्त रहता है और गड्डा खोदने के बाद यहां कोई संकेतिक बोर्ड नहीं लगाया हुआ है।
यह बोले लोग
झज्जर चुंगी से लेकर सुनारिया बाईपास तक बने गड्ढों के कारण एक महीने में दस से ज्यादा हादसे हो चुके हैं। इन गड्ढों को भरने वाला कोई नहीं है। विभाग के अधिकारी भी यहीं से आते-जाते हैं, इसके बावजूद हालत खराब है।
- नवीन बंसल
गली नंबर चार के सामने भी चार फुट का गहरा गड्ढा है। कुछ दिन पहले ही ऑटो का एक तरफ का टायर उसमें चला गया था, लेकिन वहां से गुजर रहे लोगों ने ऑटो को पलटने से बचा लिया था। फिर भी ऑटो चालक को हाथ में चोट आई।
- राजेश गोयल
एक बार नहीं तीन बार तो मैं खुद हादसे का शिकार हो चुका हूं। रात के समय दुकान बंद कर घर जाता हूं तो गड्ढे से बचने की काफी कोशिश भी की, लेकिन तीन बार टायर फंसने से सड़क पर गिर चुका हूं। प्रशासन से अपील है कि जल्द सड़क को ठीक कराया जाए।
- मदन गोपाल
वर्जन
आप हमें गड्ढों की तस्वीर भेजों, तभी बताया जा सकता है कि कहां की फोटो है और किसलिए गड्ढा खोदा गया है। पब्लिक हेल्थ भी सड़क खोदता रहता है। एक निजी कंपनी की वायर लाइन बिछाने का कार्य चल रहा था, लेकिन अब वह भी काम नहीं कर रहे हैं। बिना मंजूरी किसी को सड़क खोदने का अधिकार नहीं है।
- उदयवीर झांझरिया, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी बीएंडआर
वर्जन
सड़क की समस्या के लिए सभी नगर निगम पार्षदों से बात करेंगे और उन्हें कहेंगे वह अपने एरिया की समस्या बताएं। जहां भी शिकायत मिलेगी, उसे तुरंत दूर कराया जाएगा।
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- प्रदीप गोदारा, कमिश्नर, नगर निगम
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