रोहतक। शहर में बंदरों की बढ़ती संख्या ने लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। दिन में लोगों को छतों पर धूप सेंकना मुश्किल हो रहा है। वहीं रात में भी खाने की तलाश में बंदर घरों में घुस जाते हैं। इसको लेकर नगर निगम गंभीर नहीं है।
हालात यह है कि करीब एक साल से नगर निगम ने बंदर पकड़ने का टेंडर तक नहीं किया है जबकि नगर निगम क्षेत्र में 4000 से 5000 बंदर होने का अनुमान है। शिवाजी कॉलोनी निवासी तिलकराज ने बताया कि बंदरों की वजह से महिलाओं और बच्चों का छतों पर जाना दूभर हो गया है। बोहर गांव निवासी राजबीर ने बताया कि बंदर घरों में भी घुस जाते हैं।
केवल घरों ही नहीं बल्कि बंदर अब तो दिन में भी सरकारी कार्यालयों में भी घुस जाते हैं। वीरवार को भी एक बंदर लघु सचिवालय परिसर में चला गया। एक दिन पहले नगर निगम के कार्यालय में दो बंदरों के जाने से कर्मचारी डर गए। सुरक्षाकर्मी ने काफी मशक्कत के बाद बंदरों को निगम भवन से बाहर भगाया। तिलयार झील परिसर में भी काफी बंदर हैं।
इंसेट
रोजाना तीन लोगों को काट रहे बंदर
जिले में प्रतिदिन 3 लोगों को बंदर काट रहे हैं। वहीं हरियाणा सूचना अधिकार मंच के राज्य संयोजक सुभाष ने बताया कि बंदरों को पकड़ने का अभियान सालभर से नहीं चलाया गया है। आंकड़े बताते हैं कि साढ़े पांच साल में 146 बच्चों को बंदरों ने काटा है।
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इन क्षेत्रों में समस्या गंभीर
शहर में शिवाजी कॉलोनी, बोहर गांव, बड़ा बाजार, कायस्थान मोहल्ला, गढ़ी बोहर, आर्य नगर के अलावा सेक्टर एक, दो, तीन, चार व 14 आदि स्थानों पर बंदर बेखौफ उछलकूद करते हैं। कलानौर, तहम, लाखन माजरा व सांपला में भी बंदरों से लोगों को परेशानी हो रही है।
वर्जन
बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर नहीं हुआ है। दरअसल बंदरों को छोड़ने की जगह को लेकर पेच फंसा है। पहले कलेसर के जंगल में बंदरों को छोड़ते थे लेकिन वहां अनुमति नहीं है। ऐसे में अधिकारियों की अनुमति का इंतजार है।- सचिन गहलोत, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम रोहतक।
13-शहर में लघु सचिवालय परिसर में घुसा बंदर। संवाद