39 गोहाना रोड पर छतों पर मंडराते बंदर। संवाद
रोहतक। बंदरों के काटने की समस्या गंभीर होती जा रही है। जिले में प्रतिदिन तीन व्यक्तियों को बंदर काट रहे हैं मगर उनको पकड़ने के लिए नगर निगम का अभियान बंद है। वहीं, शहर की पुराना हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, तमाम सेक्टर व नहर के आसपास के रिहायशी क्षेत्रों में स्थिति खराब हो रही है।
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी मनोहर लाल का कहना है कि बच्चों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। छतों पर भी बंदर बैठे रहते हैं। छतों पर रखा सामान उठा ले जाते हैं। अगर उनको भगाने जाएं तो काटने के लिए दौड़ते हैं। शहर में बंदरों ने लोगों की मुसीबतें बढ़ा दी है। वहीं, सूचना अधिकार कानून से मिली जानकारी के अनुसार रोहतक में साढ़े 5 साल में 6874 व्यक्तियों को बंदर काट चुके हैं।
हरियाणा सूचना अधिकार मंच के राज्य संयोजक सुभाष ने बताया कि बंदरों को पकड़ने का अभियान नहीं चलाया गया है। साढ़े पांच साल में 146 बच्चों को भी बंदर अपना शिकार बना चुके हैं।
अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ तो लिया जाएगा लेकिन उनको छोड़ने की जगह की अनुमति नहीं मिल रही है। अधिकारियों से अनुमति मिलने पर अभियान चला दिया जाएगा। -सचिन गहलावत, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम।