38-शहर की शिवाजी कॉलोनी में छत पर मंडराते बंदर। संवाद
- फोटो : इकौना पीएचसी में हनुमान जी की पूजा करते चिकित्सक व अन्य।
रोहतक। शहर में बंदरों का उत्पात बढ़ रहा है। शिवाजी कॉलोनी, सेक्टरों और बोहर में तो छतों पर बंदर मंडराते हैं। इनके भय से बच्चों का घरों से निकला मुश्किल हो गया है। बंदरों को पकड़ने के लिए शहर में करीब दो साल से टेंडर नहीं किया है।
शिवाजी कॉलोनी निवासी कृष्ण ढल ने बताया कि बंदर छत पर सूख रहे कपड़े फाड़ देते हैं। पौधों को उखाड़ कर गमले भी तोड़ देते हैं। पानी की टंकी में कूद जाते हैं। इससे पानी प्रयोग करने से इंफेक्शन होने का खतरा बना रहता है। चंचल वोहरा ने कहा कि बंदरों के डर की वजह से बच्चे छत पर भी बेखाैफ खेल कूद नहीं सकते।
मीनाक्षी ने बताया कि बंदर दो बार उन्हें नाखून मार चुके हैं। इसका टीकाकरण करवाने में समय और पैसा दोनों की बर्बादी होने के साथ-साथ कई समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। बंदर सुबह कमरे के बाहर धमाचौकड़ी मचाना शुरू कर देते हैं। दीपक कक्कड़ का कहना है कि उनकी गली में छोटी सी किरयाने की दुकान है। इसमें बंदर बाहर रखी खाने पीने की चीजों को उठा ले जाते हैंं। उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का समाधान कराया जाए।