महम। कहने को तो सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को मॉडल संस्कृति स्कूल का नाम दे दिया गया। छात्रों को आने व जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था नजर आती है, लेकिन हकीकत से ये कोसों दूर हैं।
अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों में जो कंप्यूटर लैब बनी हुई हैं, वे सिर्फ दिखावे के अलावा कुछ भी नहीं हैं। इनमें रखे गए कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से स्थापित किए गए मॉडल संस्कृति स्कूल एक विशेष प्रकार के सरकारी स्कूल हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। खासकर, ये स्कूल उन क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं, जहां सरकारी शिक्षा का स्तर कम है। इनके बनाए जाने का मकसद बच्चों को अच्छे संसाधन, बेहतर सुविधाओं व कुशल शिक्षकों की तैनाती कर शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों का नाम करने का था, लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है।
इन स्कूलों की हालत यह है कि इनमें रखे गए कंप्यूटर आज से 15 या 20 साल पुराने हैं। इनके यूपीएस की बैटरी समाप्त हो चुकी हैं। कंप्यूटर एक्सपर्ट का कहना है कि जिस समय ये कंप्यूटर लगाए गए, उस समय पी 4, आई 3 फर्स्ट जनरेशन के कंप्यूटर थे। अब आई 7 है, जो 12 जनरेशन के कंप्यूटर आए हुए हैं। पुराने अब बंद हो चुके हैं। इन पर लगने वाले यूपीएस में लगी बैटरी खत्म हो चुकी हैं।
किराये पर लेकर चलते हैं वाहन
विद्यार्थियों को स्कूल लाने व ले जाने के लिए वाहन किराये पर रखे जाते हैं। बताया जा रहा है कि इन वाहनों का किराया तक देने के लिए बजट नहीं आ रहा है। इस कारण पिछले कई माह का किराया बकाया है। अब नये सत्र के लिए छात्रों को लाने ले जाने के लिए वाहन मिलने मुश्किल हो रहे हैं। वाहनों का चार से पांच माह का किराया बकाया है।
मॉडल संस्कृति स्कूल मदीना में पिछले 3 साल से नहीं है चारदीवारी
अगर व्यवस्था की बात करें तो अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मदीना स्थित मॉडल संस्कृति स्कूल की चहारदीवारी पिछले 3 साल से गिरी हुई है। अनाज मंडी नजदीक होने के कारण चहारदीवारी न होने का फायदा उठाकर वहां पर किसान व आढ़तियों की ओर से स्कूल परिसर में गेहूं तक डाल दिया जाता है। स्कूल में छात्रों के लिए बेंच तो हैं, लेकिन पर्याप्त नहीं हैं। यहां पर पहले सिर्फ कन्या स्कूल था। अब यह काॅमन हो जाने के कारण यहां पर लड़कों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
फिर भी बढ़ रही है छात्रों की संख्या
अव्यवस्थाओं के बावजूद मॉडल संस्कृति स्कूल मदीना में छात्रों की संख्या बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि स्कूल स्टाफ छात्रों को पढ़ाने में मेहनत करता है। स्कूल प्रिंसिपल अनुज मलिक का कहना है कि पिछले साल 200 छात्र पढ़ रहे थे, अबकी बार 250 तक संख्या पहुंचने की उम्मीद है। सुविधाओं की कमी के बावजूद शिक्षक पूरी मेहनत के साथ छात्रों को पढ़ा रहे हैं। परिणाम अच्छा आने की वजह से छात्रों की संख्या में इजाफा हो रहा है। चहारदीवारी व शौचालय के लिए विभाग को लिखा जा चुका है।
मॉडल संस्कृति स्कूल मदीना के प्रिंसिपल अनुज मलिक का कहना है कि स्कूल में लड़कों के लिए शौचालय व चहारदीवारी की मरम्मत कराने के लिए विभाग को लिखा गया है। उम्मीद है कि अब जल्दी ही इस समस्या का समाधान होगा। कंप्यूटर भी पुराने हैं, इनके लिए भी लिखा गया है। कुछ आढ़तियों ने रात को स्कूल परिसर में गेहूं डाल दिया था, जिसको उठवाया जा रहा है।
फोटो01 मॉडल संस्कृति स्कूल मदीना में धूल फांक रहे कंप्यूटर। संवाद
02 मॉडल संस्कृति स्कूल मदीना में शिक्षा ग्रहण करते छात्र। संवाद