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Rohtak News: बाजार के बीच खड़ीं मीनारें...अंदर बजती हैं घंटियां

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विमल किशोर। - फोटो : विमल किशोर।
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रवि संबरवाल
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सोनीपत। शहर के मोहल्ला कलां की तंग गलियों और बाजार की चहल-पहल के बीच आसमान छूती मीनारें दिखाई देती हैं। यहां दूर से तो मीनारें दिखाई देती हैं लेकिन जब आप अंदर जाते हैं तो श्री दुर्गा मंदिर की घंटियां सुनाई देती हैं।



मोहल्ला कलां स्थित यह ऐतिहासिक इमारत बंटवारे से पहले बड़ी मस्जिद के रूप में जानी जाती थी। उस समय सोनीपत के कई हिस्सों में मुस्लिम आबादी अधिक थी। 1947 में बंटवारे के बाद हालात बदले और मुस्लिम परिवारों के पलायन के साथ मस्जिद खाली हो गई।
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बाद में पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों ने इसे संरक्षित रखने के लिए मंदिर के रूप में स्वीकार कर लिया। वर्तमान में यह स्थल श्री दुर्गा मंदिर के रूप में पहचाना जाता है। श्री सनातन धर्म सभा इसका संचालन करती है। मंदिर में नियमित रूप से आरती और पाठ होता है और आसपास के लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं।



इमारत की सबसे खास पहचान इसकी ऊंची मीनारें और पुराने गुंबद हैं, जो आज भी दूर से दिखाई देते हैं। बाजार और मकानों के बीच घिरी यह संरचना पुरानी मस्जिद की बनावट को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।



बदलाव के बावजूद इमारत का मूल स्वरूप काफी हद तक सुरक्षित है। मीनारें और गुंबद अब भी पुराने समय की वास्तुकला को दर्शाते हैं। बताते हैं कि यह स्थल कभी मस्जिद रहा होगा।

संरक्षित करने के लिए दिया मंदिर का रूप

श्री सनातन धर्म सभा दुर्गा मंदिर के प्रधान बलदेव राज आहूजा बताते हैं कि पूर्वजों के समय से ही यह स्थल मंदिर के रूप में देखा जा रहा है। इसे संरक्षित रखने के लिए मंदिर का रूप दिया गया था। सभी के सहयोग से बिना किसी विवाद के मंदिर का संचालन हो रहा है। रोजाना यहां आरती और पाठ होता है।

समय के साथ यह लोगों की आस्था का केंद्र बना

स्थानीय नेता विमल किशोर का कहना है कि बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए परिवारों ने यहां मंदिर स्थापित किया। समय के साथ यह लोगों की आस्था का केंद्र बन गया। लोगों में आपसी भाईचारा बना हुआ है।

आसपास के लोग मिल-जुलकर रह रहे

स्थानीय निवासी शमशाद बताते हैं कि वे करीब 15 साल से यहां रह रहे हैं। पुराने लोग बताते हैं कि यह जगह बड़ी मस्जिद के नाम से जानी जाती थी। हालांकि, अब यहां मंदिर है। आसपास के लोग मिलजुलकर रहते हैं।
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वर्जन-



-पहले यह मस्जिद मुरथल अड्डा के नाम से जानी जाती थी, जिसे अब श्री कृष्ण मंदिर का रूप दिया गया है। मीनारें, गुंबद और पीर की सैयद आज भी संरक्षित हैं। हालांकि मुख्य ढांचा बदला गया है।



-मोहम्मद सलीम, स्टेट ऑफिसर, वक्फ बोर्ड सोनीपत।

विमल किशोर।- फोटो : विमल किशोर।

विमल किशोर।- फोटो : विमल किशोर।

विमल किशोर।- फोटो : विमल किशोर।

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