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हमेशा याद रहेगा पुत्र जन्म का घटनाक्रम शेल्टर होम बना मजदूरों का दूसरा घर

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shelter home me reh rahi mahila shramik ko pgi me delivery ke baad uphar deti dc rs verma ki patni pushpa verma. - फोटो : RohtakCity
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रोहतक। मध्य प्रदेश की रहने वाल श्रमिक गुड्डी ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह बच्चे को जन्म देने के बाद जिले के सबसे बड़े अधिकारी की गाड़ी में बैठ कर शेल्टर होम पहुंचेगी। उसकी इस खुशी के आगे लॉकडाउन की सारी कठिनाइयां फीकी पड़ गई हैं। गुड्डी और उसका बच्चा स्वस्थ हैं और दयानंद मठ के शेल्टर होम में खुशी के साथ रह रहे हैं।
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गुड्डी के साथ उसका पति, मां समेत बारह पारिवारिक मेंबर रह रहे हैं। छतरपुर जिले के गांव रामपुर की रहने वाली गुड्डी, उसका पति अशोक अहरवाल व अन्य लोग दादरी जिले के रानीला में कंस्ट्रक्शन लेबर का काम करते थे। लॉकडाउन घोषित होते ही वे रानीला से पैदल दिल्ली जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें शेल्टर होम भिजवाया। यहां सभी मजदूरों को तीन टाइम खाना, फल, चाय आदि दिया जाता है। अशोक ने बताया कि उसकी पत्नी को जैसे ही प्रसव पीड़ा हुई, प्रशासन ने तुरंत एंबुलेंस भेजी, पीजीआई में साधारण डिलिवरी से पुत्र ने जन्म लिया। उपायुक्त आरएस वर्मा की पत्नी पुष्पा वर्मा ने अपनी गाड़ी में बिठा कर उन्हें पीजीआई से शैल्टर होम पहुंचाया। उन्होंने गुड्डी को साड़ियां, बच्चों के कपड़े और शगुन भी दिया। इस व्यवहार से पूरा श्रमिक परिवार बहुत खुश है। उनका कहना है कि डिलिवरी के दौरान ऐसी सुविधा शायद उन्हें अपने गांव में भी नहीं मिल पाती। अब वे बस इस इंतजार में हैं कि कब लॉकडाउन खत्म हो और बाकी पारिवारिक मेंबरों के साथ खुशियां बांटे। डीसी वर्मा ने बताया कि दयानंद मठ में रह रहे प्रवासी मजदूर के परिवार की गर्भवती महिला के लिए पौष्टिक आहार और चिकित्सा सेवा का प्रबंध किया गया था। जच्चा-बच्चा को निरंतर पौष्टिक आहार दिया जा रहा है।
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