रोहतक। 30 साल पहले हुए महम कांड व रामपाल के खिलाफ 2006 में दर्ज हत्या के मामले में अलग-अलग कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। महम कांड में एक बार फिर बताया गया कि अभय चौटाला को भेजे गए सम्मन नहीं मिले। अब मामले में 17 मार्च को सुनवाई होगी। जबकि रामपाल के खिलाफ हत्या के मामले में अदालत ने पुलिस को हिदायत दी है कि घायलों का मेडिकल करने वाले गवाह पीजीआई के डॉक्टर को 28 फरवरी तक अदालत में पेश करे।
वरिष्ठ वकील विनोद अहलावत ने बताया कि भिवानी जिले के गांव खरक जाटान निवासी रामफल ने अपने वकील एसएस सांगवान के माध्यम अदालत में सीआरपीसी की धारा 397 के तहत याचिका दायर की थी कि 27 फरवरी 1990 को महम विधानसभा के उपचुनाव में उसके बड़े भाई हरि सिंह की मौत हो गई थी। इसके लिए अभय चौटाला, पूर्व डीआईजी शमशेर सिंह अहलावत, करनाल के पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेश चंद्र, भिवानी के डीएसपी रहे सुखदेव राज राणा व गांव दरियापुर के भूपेंद्र उर्फ भूपी, हिसार के गांव दौलतपुर निवासी पप्पू और फतेहाबाद जिले के गांव गिल्ला खेड़ा निवासी अजीत सिंह जिम्मेदार हैं। लंबे समय तक पुलिस सहित कई एजेंसी ने जांच की, लेकिन मामला अनट्रेस मानकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। इसके चलते रामफल ने महम अदालत में याचिका दायर कर दोबारा से मामले की जांच की मांग की। महम अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। इसके चलते रामफल ने एडीजे कोर्ट में अपील की थी। अब केस की सुनवाई सेशन जज एएस नारंग की अदालत में चल रही है। अदालत की तरफ से अभय चौटाला को छोड़कर अन्य आरोपियों को सम्मन मिल चुके हैं। उनकी तरफ से वकील भी कोर्ट में हाजिरी लगा चुके हैं। कोर्ट ने लगातार अभय चौटाला को सम्मन भेज रही है, लेकिन वे तामिल नहीं हो रहे हैं। शुक्रवार को कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत में रिपोर्ट दी गई कि सिरसा के तेजाखेड़ा में अभय चौटाला के नाम सम्मन भेजे गए थे, लेकिन वे तामिल नहीं हो सके।
हत्या के मामले में गवाह को अदालत में लेकर आए पुलिस
साल 2006 से जिला अदालत में रामपाल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ अदालत में हत्या का केस चल रहा है। शुक्रवार को एडीजे रितु वाईके बहल की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने सदर पुलिस से पूछा कि गवाहों की सूची में शामिल पीजीआई के उस डॉक्टर को कोर्ट में लाया जाए, जिसने घटना के बाद घायलों की एमएलआर रिपोर्ट तैयार की थी। पुलिस ने बताया कि डॉक्टर के परिजनों का कहना है कि डॉक्टर आस्ट्रेलिया गया हुआ है। अदालत ने पुलिस को हिदायत दी कि 28 फरवरी को डाक्टर के अदालत में बयान दर्ज करवाए जाएं। बचाव पक्ष के वकील सुनील कुमार ने बताया कि स्वामी दयानंद द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर कथित टिप्पणी के चलते रामपाल समर्थकों और रामपाल समर्थकों के बीच तनाव पैदा हो गया था। इसी के चलते सैकड़ों ग्रामीण व आर्य समाजी करौंथा स्थित रामपाल के सतलोक आश्रम के बाहर 14 साल पहले एकत्रित हुए। विवाद में गोली लगने से झज्जर जिले के युवक सोनू की मौत हो गई थी। सदर पुलिस ने रामपाल सहित 38 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था।