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एमडीयू में इंस्ट्रूमेंट खरीद में सात लाख के घपले की बू, जांच बैठी

Mon, 27 Jun 2016 01:55 AM IST
विनीत तोमर/अमर उजाला, रोहतक
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एमडीयू - फोटो : file photo
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की केमिस्ट्री लैब के लिए खरीदे गए इंस्ट्रूमेंट में करीब सात लाख रुपये के घपले का मामला सामने आ रहा है। दिल्ली की एक कंपनी के इंस्ट्रूमेंट को विवि के एक विभाग ने नवंबर में 22.70 लाख में खरीदा। ठीक दो माह बाद उसी इंस्ट्रूमेंट को उसी कंपनी से दूसरे विभाग ने खरीदना चाहा तो उसे 16 लाख रुपये का ऑफर दिया गया। फार्मेसी डिपार्टमेंट की तरफ से ऑडिट में भेजे गए परमिशन लेटर के बाद मामले का खुलासा हुआ तो इसकी जांच बैठा दी गई है।
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दरअसल, एमडीयू के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की लैब के लिए नवंबर-2015 में एक इंस्ट्रूमेंट खरीदा गया। दिल्ली की प्राइवेट कंपनी ने इस इंस्ट्रूमेंट की कीमत 22.70 लाख रुपये ली। इसके बाद जनवरी माह में फार्मेसी डिपार्टमेंट को सरकार की तरफ से एक प्रोजेक्ट दिया गया। इस प्रोजेक्ट के लिए फार्मेसी डिपार्टमेंट को भी उसी इंस्ट्रूमेंट की जरूरत थी, लेकिन सरकार की तरफ से केवल 16 लाख रुपये की ग्रांट दी गई थी। इंस्ट्रूमेंट के लिए फार्मेसी डिपार्टमेंट ने दिल्ली की उसी कंपनी से संपर्क किया जिससे केमिस्ट्री विभाग ने इंस्ट्रूमेंट खरीदा था। विभाग ने कंपनी से कोटेशन मांगते समय साफ बता दिया कि उसके पास सिर्फ 16 लाख रुपये का बजट है। इस पर कंपनी ने फार्मेसी डिपार्टमेंट को 16 लाख रुपये का ऑफर दे दिया। हालांकि इसमें कुछ एसेसरीज कम कर दी गई।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा
इंस्ट्रूमेंट के लिए 16 लाख का ऑफर मिलने के बाद फार्मेसी डिपार्टमेंट की तरफ से ऑडिट डिपार्टमेंट के अधिकारियों को खरीद के लिए परमिशन लेटर भेजा गया। ऑडिट डिपार्टमेंट ने पहले वाली खरीद और बाद के आफर के अंतर को पकड़ लिया। अधिकारियों ने सवाल किया कि आखिर दो माह में ही एक इंस्ट्रूमेंट की कीमत 6.70 लाख रुपये कम कैसे हो सकती है? मामला पकड़ में आने के बाद फार्मेसी डिपार्टमेंट के लिए खरीदे जाने वाले इंस्ट्रूमेंट की फाइल रोक दी गई। अब मामले की जांच की जा रही है।
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उठ रहे सवाल, जिम्मेदार कौन?
इंस्ट्रूमेंट खरीद में हुए गोलमाल में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद पता चलेगा। फिलहाल कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एक सवाल यह है कि दो माह के अंदर एक इंस्ट्रूमेंट की कीमत इतनी कम कैसे हो सकती है। दूसरा सवाल यह है कि कंपनी ने पहले अधिक दामों पर यूनिवर्सिटी को इंस्ट्रूमेंट बेचा था या यूनिवर्सिटी से जुड़ा कोई अधिकारी महंगी कीमत पर इसे खरीदा था। सूत्रों की मानें तो जांच में सिद्ध होने पर संबंधित कंपनी से अधिक लिए गए रुपये वसूले जाएंगे और उसे ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।
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वर्जन
इंस्ट्रूमेंट खरीद का मामला मेरे यहां आने से पहले का होगा। संबंधित डिपार्टमेंट से इस बारे में जानकारी लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया, कुलपति एमडीयू
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