एक क्लास, एक सत्र, एक संस्थान लेकिन मार्कशीट अलग-अलग। यह जानकर आपको थोड़ी हैरानी होगी, लेकिन यह है सौ फीसदी सच। जी हां, एमडीयू में एक बार फिर से ऐसा ही मामला सामने आया है। आरटीआई के तहत अलग-अलग विभागों से मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है। अब इसे लापरवाही कहा जाएगा या फिर फर्जीवाड़ा, यह तो यूनिवर्सिटी ही जाने, लेकिन अलग-अलग मार्कशीट पर कई सवाल जरूर उठ रहे हैं।
दरअसल, शहर के रहने वाले चरण सिंह ने कुछ दिन पूर्व खेल कोटे के तहत अलग-अलग विभागों में नौकरी कर रहे तीन लोगों की डिग्री के संबंध में आरटीआई से सूचना मांगी थी। पुलिस समेत कई अन्य विभागों से अब आरटीआई का जो जवाब मिला है, उस पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरटीआई में वर्ष 2001 से लेकर 2003 तक की बीए की अलग-अलग वर्ष की मार्कशीट की फोटो कॉपी उपलब्ध कराई गई। इसमें सबसे अधिक 2002 की मार्कशीट सवालों के घेरे में है। दो अलग-अलग लोगों की मार्कशीट में केवल एक मार्कशीट पर सब्जेक्ट और उसका कोड डाला गया है, जबकि दूसरी मार्कशीट में केवल सब्जेक्ट लिखा गया है। क्लास और साल अलग-अलग होने पर यह संभव हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि एक ही साल, एक ही क्लास और एक ही संस्थान में ऐसा कैसे हो सकता है। इसके अलावा 2001 की एक मार्कशीट पर केवल नौ कॉलम दिए गए हैं, जिसमें कोई सब्जेक्ट कोड भी नहीं है, जबकि उसी क्लास की दूसरी मार्कशीट पर 15 कॉलम हैं और सब्जेक्ट कोड भी अंकित हैं। ऐसे में कहीं न कहीं इन मार्कशीट पर सवाल खड़े हो रहे हें। खैर इसका कारण जो भी हो, लेकिन इससे कहीं न कहीं लापरवाही या फर्जीवाड़े की आशंका लग रही है।
पहले भी सुर्खियों में रही है यूनिवर्सिटी
एमडीयू का परीक्षा विभाग पहले भी कई मामलों पर सवालों के घेरे में आ चुका है। कुछ साल पहले छत पर मिली उत्तर पुस्तिकाएं हों या फिर मार्कशीट के अंकों में छेड़खानी, किसी न किसी मामले पर यूनिवर्सिटी सुर्खियों में रही है।
ये दिया जिम्मेदार ने जवाब
इस बारे में जब परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस सिंधु से जानकारी ली गई तो उनका जवाब कुछ ऐसा था। उनका कहना था कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। कई बार मार्कशीट पर सब्जेक्ट कोड डाल दिया जाता है और कई बार नहीं। इसके बाद जब उनसे पूछा गया कि एक ही सत्र में एक ही क्लास में क्या यह संभव है तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।