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Rohtak News: भ्रूण लिंग जांच और बिगड़ते लिंगानुपात पर अंकुश लगाएगा एमसीटीएस

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रोहतक। प्रदेश का गिरता लिंगानुपात सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी पहल शुरू की है। गर्भवती को प्रसूति तक ट्रैक किया जाएगा। इसके लिए एमसीटीएस (मदर एंड चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम) लागू किया गया है। इसके तहत प्रत्येक गर्भवती की पहली जांच पर ही एमसीटीएस पंजीकरण किया जाएगा। पंजीकरण के बाद गर्भवती को 12 अंकों की डिजिटल पहचान दी जाएगी। इसी से न केवल अल्ट्रासाउंड होगा, बल्कि दवा व अन्य सुविधा मुहैया होगी।
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हरियाणा का नाम लिंगानुपात को लेकर लगातार चर्चाओं में रहा है। इसमें ज्यादातर खराब लिंगानुपात के लिए ही नाम रहा है। रोहतक में भी लिंगानुपात की कमोबेश यही स्थिति है। 2021 से जिले के लिंगानुपात में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसमें सुधार करने के लिए जिले के सभी डायग्नोस्टिक सेंटर और निजी अस्पतालों में अब एमसीटीएस पंजीकरण लागू किया गया है। पंजीकरण कराने पर गर्भवती को 12 अंकों की आईडी दी जाएगी। गर्भवती की डिलीवरी होने तक इसी डिजिटल आईडी से इलाज किया जाएगा। विभाग के पास गर्भवती का डाटा उपलब्ध होने से उन्हें ट्रैक किया जा सकेगा। डिजिटल आईडी बगैर गर्भवती महिलाओं को सरकारी या निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड या उपचार की सुविधा नहीं मिलेगी। इससे भ्रूण लिंग जांच या गर्भपात करने वालों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। इस काम को आसान बनाने के लिए विभाग ने सभी जिलों को एमसीटीएस के तहत गर्भवती का पंजीकरण अनिवार्य किया है।
स्वास्थ्य विभाग गर्भवती का पंजीकरण पहले भी करता था। पंजीकरण के बाद कहीं भी अल्ट्रासाउंड हो जाता था। निजी अस्पतालों या केंद्रों में बगैर आईडी जाने या लिए ही अल्ट्रासाउंड कर दिया जाता था। बगैर पंजीकरण अल्ट्रासाउंड या इलाज करने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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चार साल से लिंग अनुपात में गिरावट
साल लिंग अनुपात
2021 945
2022 934
2023 883
2024 888

वर्जन
गिरते लिंगानुपात को सुधारने के लिए विभाग की तरफ से सभी जिलों में एमसीटीएस पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। जिले में भी पंजीकरण शुरू हो चुका है। लिंग अनुपात सुधारने के लिए लोगों को भी जागरूक किया जा रहा हैं। इसके लिए भ्रूण लिंग जांच करने वालों के खिलाफ विभाग की तरफ से पिछले कुछ माह में कार्रवाई तेज कर दी गई है।
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- डॉ. विश्वजीत राठी, नोडल अधिकारी पीएनडीटी, रोहतक
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