रोहतक। नगर निगम की आर्थिक सेहत ठीक नहीं है। क्योंकि पांच शाखाओं की रिकवरी पिछले की साल की अपेक्षा कम हो गई है। खासकर एलओ शाखा पूरा किराया नहीं वसूल पा रही है। जबकि प्रॉपर्टी टैक्स की रिकवरी भी संतोषजनक नहीं है। अगर तहसील में होने वाली रजिस्ट्री की शर्त को हटा दिया जाए। साथ निगम स्ट्रीट लाइट का कितना मासिक बिल भर रहा है, इसको लेकर भी पेंच फंसा हुआ है। शुक्रवार को मेयर मनमोहन गोयल की मौजूदगी में निगम आयुक्त प्रदीप गोदारा के कार्यालय में ये सवाल उभर कर सामने आए।
साल 2019 में पहले लोकसभा व फिर विधानसभा चुनाव के चलते नगर निगम का कामकाज प्रभावित रहा। जबकि 2020 में कोरोना महामारी ने कमर तोड़ दी। ऊपर से प्रदेेश सरकार ने पैसे की कमी बताकर विकास कार्यों के लिए फंड देना बंद कर दिया। इसके चलते नगर निगम को अपने संसाधनों से काम चलाना पड़ रहा है। नगर निगम की आमदनी व खर्च के ब्यौरे की समीक्षा के लिए शुक्रवार को निगम कार्यालय में सभी शाखाओं के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। बैठक में मेयर मनमोहन गोयल ने भी शिरकत की। गहराई से एक-एक शाखा का लेखा-जोखा लिया गया।
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आमदनी कम हुई, किराया पूरा नहीं आया
मेयर ने बताया कि बैठक में जांच करने पर पता चला कि नगर निगम की पांच शाखाओं की आमदनी कम हुई है। इसमें सबसे ज्यादा प्रभाव एलओ शाखा पर पड़ा है। क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते दो माह का किराया तो सरकार ने माफ कर दिया। दूसरा, कोरोना के चलते व्यापारी किराया देने में आनाकानी कर रहे हैं। दूसरा, प्रॉपर्टी टैक्स शाखा की रिकवरी भी संतोषजनक नहीं है। अगर तहसील में रजिस्ट्री के लिए एनओसी की शर्त हटा दी जाए तो निगम को विकास शुल्क व प्रॉपर्टी टैक्स बहुत कम मिलता।
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विकास कार्यों पर खर्च बेहद कम, गड्ढे तक नहीं भरे गए
साल 2020 में नगर निगम ने शहर के विकास कार्यों पर बेहद कम पैसे खर्च किए हैं। आलम यह है कि निगम को बारिश के तुरंत बाद हर वार्ड में 4-4 लाख रुपये का टेंडर करके गड्ढे भरने थे, लेकिन आधे वार्डों में अब भी काम शुरू नहीं हुआ है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बजट की कमी तो है, लेकिन टेंडर ज्यादा राशि के भरने के कारण भी दिक्कत आ रही है।
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ढाई करोड़ साल में भरा जाता था स्ट्रीट लाइट बिल, अब 1 करोड़ हर माह
बैठक के अंदर स्ट्रीट लाइट को लेकर मेयर ने सवाल किया। मेयर ने कहा कि, पहले नगर निगम को प्रति यूनिट 5 पैसे स्ट्रीट लाइट के लिए मिलता था। अब सरकार ने 16 पैसे कर दिया। यह पैसा कहां जा रहा है। जबकि पहले ढाई करोड़ रुपये सालाना बिजली का बिल निगम जमा करवाता था। अब एक करोड़ प्रति माह कैसे भरा जा रहा है। निगम आयुक्त ने कहा कि सोनीपत की तर्ज पर पूरी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था की जांच करवाई जा रही है। इसके लिए तीन सदस्यीय टीम बनाई है।
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स्ट्रीट लाइट को लेकर पेंच फंसा है। क्योंकि सरकार पहले से ज्यादा राशि स्ट्रीट लाइट टैक्स के तौर पर नगर निगम को दे रही है। यह पैसा कहां जा रहा है। इसको लेकर अभी अधिकारियों से पूरा हिसाब नहीं दिया है। इसके अलावा निगम की पांच शाखा की आमदनी कम हो गई है।
-मनमोहन गोयल, मेयर नगर निगम
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प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी तो ठीक है, लेकिन किराया कम जरूर आया है। क्योंकि दो माह का किराया सरकार ने कोरोना के चलते हुए लाकडाउन की वजह से माफ कर दिया था। जहां तक स्ट्रीट लाइट के बिल का सवाल है, मामले की गहराई से जांच करवा रहे हैं। इसके लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। निगम के एक-एक पैसे का हिसाब रखा जा रहा है।
-प्रदीप गोदारा, आयुक्त नगर निगम
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कमिश्नर के दरवाजे पर लगाया नोटिस, नौकरी मांगने न आएं
उधर, नगर निगम आयुक्त के कार्यालय के दरवाजे पर नोटिस चस्पा करवा दिया है। कोई निगम आयुक्त से नौकरी के लिए मिलने न आए। बता दें कि निगम ने पिछले दिनों 35 कर्मचारियों की छुट्टी कर दी थी। बाद में आधे कर्मचारी समायोजित कर लिए थे। इसके अलावा निगम खर्च कम करने के लिए कई कदम उठा रहा है। इसके चलते नई नौकरी देना बंद कर दिया है।