माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल भक्त। स्रोत: आयोजक
रोहतक। माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गायत्री के निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। साध्वी मानेश्वरी देवी ने भजन, कीर्तन, सत्संग किया। इसके बाद निशुल्क आंख जांच शिविर कैंप का आयोजन किया गया। इसमें 200 लोगों की आंखों की जांच की गई।
श्रीमद्भागवत कथा में साध्वी यमुना दीदी ने गणेश वंदना की। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण जन्म के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अहंकार ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। मनुष्य को कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए, अहंकार बुद्धि और ज्ञान का हरण कर लेता है।
उन्होंने कहा कि अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। देवी पूजा ने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। जैसे ही कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, पूरा पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। श्रीकृष्ण जन्म उत्सव पर नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की भजन प्रस्तुत किया। पहलगाम में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए मौन धारण किया।