मेरा तो सब कुछ उजड़ गया है। अब मैं कैसे जीऊंगी, वो मुझसे वापस आने का वादा कर गए थे। बदहवास होकर कुछ यही कह रही थी हरीश की पत्नी अनु। पहले करवाचौथ से पहले ही पति हरीश की मौत का पता चलते ही अनु सदमे में कभी जोर-जोर से रो रही थी, तो एकाएक जोर-जोर से हंसने लगती थी।
48 घंटे से लापता गांधी कैंप निवासी हरीश का शव रविवार दोपहर को चुलियाना और खरावड़ के बीच से जा रही माइनर में मिल गया। पिता खरैती लाल व अन्य ने पीजीआई पहुंच शव की शिनाख्त की। पीजीआई में पोस्टमार्टम होने के बाद देर शाम पुलिस की मौजूदगी में हरीश का अंतिम संस्कार हुआ।
पोस्टमार्टम के बाद हरीश का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। हरीश का शव देख सही सलामत उसके घर तक पहुंचने का इंतजार कर रही उसकी नवविवाहिता पत्नी अनु का संयम टूट गया। वह शव से चिपट कर रोने लगी। महिलाओं ने उसे शव से दूर किया।
कई सालों से अपाहिज मां राज को बेटे का शव पहुंचने की जानकारी मिली तो बिलख उठी। घसीटती हुई हरीश के शव तक पहुंच उसे जगाने का प्रयास करने लगी। सास और बहू ही यह हालत देख मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। स्थानीय विधायक बी.बी. बतरा भी परिवार के दु:ख में शामिल हुए।
... मेरा चूड़ा मत उतारो, अच्छा लगता है - हरीश का विवाह करीब डेढ़ माह पहले ही अनु से हुआ था। अनु अभी भी हाथ में चूड़ा पहने हुई थी, जो करीब छह माह तक विवाहिता के हाथ में रहता है। अनु पहले करवाचौथ को लेकर काफी खुश थी। महिलाएं जब उसके हाथों से चूड़ा उतारने लगीं, तो वह चित्कार उठी, कहने लगी, मेरा चूड़ा मत उतारो, अच्छा लगता है।
हरीश ही परिवार का सहारा था - पड़ोसियों ने बताया कि हरीश के परिवार के काफी बुरे हाल है। उसके पिता काफी बुजुर्ग हैं। वे चाय की दुकान करते हैं। उन्हें आंखों से कम दिखता है। मां अपाहिज है। बड़ा भाई पंकज बोल नहीं पाता है और छोटा भाई हैप्पी बीमार रहता है। घर में केवल हरीश ठीक था। ऑटो मिस्त्री हरीश ही परिवार का सहारा था।