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विकास शुल्क के विरोध में सड़कों पर उतरे

Sun, 29 Dec 2013 10:52 PM IST
रोहतक/ब्यूरो
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शहर में विकास शुल्क और बिजली की बढ़ाई गई दरों के विरोध में नागरिक मंच के बैनर तले रविवार को सैकड़ों नागरिकों एवं जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने शहर में प्रदर्शन किया।
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अशोक चौक पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच मामूली झड़प भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पांच जनवरी तक सांसद ने बातचीत कर हस्तक्षेप नहीं किया तो अनशन से आर-पार का आंदोलन शुरू होगा।


नागरिक मंच के बैनर तले रविवार को विभिन्न संगठनों के सदस्य छोटूराम पार्क में एकत्रित हुए। मंच के संयोजक मेजर मेहर सिंह मलिक ने कहा कि विकास शुल्क बेतुका है। कैबिनेट ने 18 दिसंबर को विकास शुल्क को कम करते हुए चार स्लैब बनाए। उन्होंने कहा कि जब विकास के ढांचे सड़क, सीवरेज आदि एक जैसे हैं, तो चार स्लैब क्यों बनाए गए। उन्होंने विकास शुल्क को रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 104 कालोनियों में दुकानों पर 2163 रुपये प्रति गज शुल्क अवहनीय व अव्यवहारिक है, परंतु इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है।
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बिजली निगम में करोड़ों के घोटाले, उपभोक्ताओं पर बोझ
मलिक ने कहा कि बिजली बिलों में बढ़ोतरी के लिए बिजली अधिनियम 2003 जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली निगम में सालाना 450 करोड़ के घोटाले हो रहे हैं। इस राशि को बिजली की लागत में जोड़ने से दरों में बढ़ोतरी हो रही है। बिजली बिलों में मनमाने शुल्क जोड़ना गलत है। स्लैब प्रणाली खत्म होने के कारण उपभोक्ताओं पर 36 प्रतिशत बोझ बढ़ा है। उन्होंने कहा कि बिजली की लागत से ज्यादा वसूली पूरी तरह बंद हो।

जनवरी के तीसरे सप्ताह में आर-पार की लड़ाई
नागरिक मंच के बैनर तले विभिन्न संगठनों के सदस्य मुख्यमंत्री आवास के घेराव के लिए चल पड़े। अशोक चौक पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने पहले ही बेरीकेड लगा रखे थे। जब प्रदर्शनकारी अशोक चौक पर पहुंचे तो पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झड़प भी हुई। तहसीलदार ने मौके पर पहुंच प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि पांच जनवरी तक सांसद दोनों मुद्दों का समाधान नहीं करते हैं तो पूरे शहर में चरणबद्ध अनशन शुरू कर देंगे और जनवरी के तीसरे सप्ताह में आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

प्रदर्शनकारियों में जयसिंह पूनिया, बिजली कर्मचारी नेता देवेंद्र हुड्डा, महा सिंह देशवाल, ओमप्रकाश सिवाच, कैप्टन राजेंद्र हुड्डा, विनोद, जयप्रकाश बैनीवाल, वीना, कृष्णा, पूनम, प्रीत सिंह, बिजेंद्र, संजय, सतपाल, ओमप्रकाश, रामगोविंद, नरेश कुमार, जसवंत, एडवोकेट रामचंद्र सिवाच, सुमित, कंचन शर्मा, प्रो. आत्मानंद, धर्मवीर शर्मा, बलजीत, नवीन सैनी, एडवोकेट अतर सिंह हुड्डा, मान सिंह और राममेहर ढुल आदि शामिल रहे।

ये हैं मुख्य मांगें  
विकास शुल्क पूरी तरह रद्द किया जाए व नोटिसों को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए, बिजली निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए ताकि बिजली की दरें कम की जा सकें, बिजली बिलों में जोडे़ गए अनाप-शनाप शुल्क खत्म हो, बिजली बिलों की पूर्ववर्ती स्लैब प्रणाली बहाल की जाए,  निगम पार्षद विकास शुल्क के नोटिसों पर अपना रवैया स्पष्ट करे।
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