द बहलबा सहकारी समिति में पिछले कई सालों से अव्यवस्था है। गबन के आरोप में सस्पेंड चल रहे प्रबंधक को जहां उच्चाधिकारियों ने बहाली के आदेश दिए हैं, वहीं पुराने प्रबंधक अपना चार्ज छोड़ने को तैयार नहीं हैं। पिछले कई दिनों से बहलबा में ग्रामीणों व बैंक कर्मचारियों की आपस में खींचतान चल रही है। बुधवार को प्रबंधक और ग्रामीणों में नोक झोंक हो गई। मामला बढ़ता देख प्रबंधन को पुलिस बुलानी पड़ी। थाना प्रभारी रमेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत कराया। पूर्व सरपंच मनोज अहलावत ने आरोप लगाया कि सहकारी समिति ने 2017 में बीमा कंपनी द्वारा किसानों को मुआवजे के रूप में दिए गए लगभग एक करोड़ 30 लाख रुपये में से 42 लाख रुपये गबन कर लिए। नई समिति का गठन होने के बाद यह मामला सामने आया कि 42 लाख रुपये सिर्फ कागजों में ही किसानों को बांट दिए गए। जब इसकी सूची गांव के किसानों तक पहुंची तो जिन किसानों के नाम से रकम निकाली गई थी उनमें खलबली मच गई तथा सोसाइटी में आकर हंगामा कर दिया। इसके अलावा जिन किसानों के नाम पर मुआवजा आया हुआ है वे भी बैंक में अपनी रकम लेने के लिए पहुंच गए।
समिति के प्रधान बिजेंद्र अहलावत का कहना है कि उन्होंने किसानों के चेक काटने शुरू कर दिए जाने के बाद बैंक प्रबंधक ने किसानों को राशि देने से मना कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि बैंक कर्मचारी अधिकारियों के साथ मिलकर किसानों की राशि हड़प गए हैं और बची राशि को भी हड़पना चाहते हैंं।
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निलंबित प्रबंधक को बहाली के आदेश के बाद भी नहीं मिल सका चार्ज
गबन के आरोप में निलंबित चल रहे एक प्रबंधक को उच्चाधिकारियों के आदेश के बाद भी चार्ज नहीं दिया गया है। समिति सदस्यों ने बताया कि स्थिति यहां तक बनी हुई है कि पुराना और नया प्रबंधक दोनों ही पद पर अपना अपना हक जता रहे हैं। इस प्रकार बैंक का कार्य प्रभावित हो रहा है।
हमारे पास अभी तक किसी प्रकार की लिखित शिकायत नहीं आई है। किसानों की राशि के गबन को लेकर जांच की जाएगी। निलंबित प्रबंधक के मामले में उच्चाधिकारियों के साथ पत्र व्यवहार किया जा रहा है।
मनोज, समिति निरीक्षक