रोहतक। सप्तरंग संस्था और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) रोहतक के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को पर्यावरण प्रदूषण पर आईएमए सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। पीजीआईएमएस के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. ध्रुव चौधरी ने कहा कि पर्यावरणीय संकट मनुष्य जनित अधिक है।
इससे मनुष्य, पेड़ व जीव-जंतु भी प्रभावित हो रहे हैं। वायु प्रदूषण के चलते हवा इतनी खराब है कि 18 से 20 सिगरेट के बराबर का प्रदूषण सांसों में ले रहे हैं। उन्होंने वायु प्रदूषण की वजह से सांस के रोग, ब्रोंकाइटिस, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से संबंधित रोगों पर भी चर्चा की।
एमडीयू के पर्यावरण विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजेश धनखड़ ने वायु, जल व मृदा प्रदूषण की रोकथाम के लिए उपायों की चर्चा की। पराली जलाने से अधिक प्रदूषण वाहनों, निर्माण कार्यों, कूड़ा-करकट व धूल से भी होता है।
पीजीआईएमएस के कार्डियोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. अश्विनी ने प्रदूषण से होने वाले हृदय रोग के बारे में जानकारी दी। डॉ. रवि मोहन ने कहा कि मनुष्य तथा पर्यावरण के मध्य सामंजस्य की आवश्यकता है। डॉ. अरुण नरूला ने कहा कि बुजुर्गों के साथ-साथ युवा वर्ग और बच्चे भी प्रदूषण जनित रोगों का शिकार बन रहे हैं, जो की बेहद चिंताजनक है।
आईएमए रोहतक की अध्यक्ष डॉ. आरती साहू ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तथा पर्यावरण प्रदूषण रोकथाम के प्रति समस्या निवारण रूपी संवाद की जरूरत है। इस दौरान चिकित्सा डॉ. ईश्वर सिंह, प्रो. महेश गुप्ता, पर्यावरण एक्टिविस्ट, डॉ. जसमेर हुड्डा, कुदरती खेती एक्टिविस्ट प्रो. राजेंद्र चौधरी व अन्य उपस्थित रहे।