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Rohtak News: भतीजी की हत्या के दोषी चाचा-चाची व चचेरे भाई सहित छह को आजीवन कारावास

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सांघी गांव में छह साल पहले हुए कविता हत्याकांड में एएसजे रजनी यादव की अदालत ने सभी छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 5 लाख 10 हजार रुपये जुर्माना भी किया है। दोषियों में कविता का चाचा बलवान, चाची ब्रह्मी देवी, चचेरा भाई हरीश, हरीश का दोस्त विपिन, सुनील व सचिन शामिल हैं।
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पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक, जून 2018 को सांघी गांव निवासी सेवा सिंह ने सदर थाने में शिकायत दी थी कि उसके बेटे रवींद्र की चाचा बलवान सिंह के साथ मामूली कहासुनी हो गई थी। उसने दोनों को समझाकर शांत कर दिया था। अगले दिन सुबह करीब 9 बजे वह बेटे रवींद्र व प्रवीण, बेटी कविता व पत्नी रामभतेरी के साथ घर में बैठे थे। उसी समय उसका भाई बलवान सिंह व बलवान की पत्नी ब्रह्मी देवी आकर गाली-गलौज करने लगे। इतनी देर में बलवान का बेटा हरीश अपने दोस्त सुनील उर्फ शीना, सचिन व विपिन के साथ आ गया। आते ही चाकू व डंडों से हमला कर दिया। उसके बेटे रविंद्र व बेटी कविता के चाकू मारकर घायल कर दिया। उसे व उसकी पत्नी को डंडों से घायल कर दिया। इसके बाद आरोपी धमकी देकर भाग गए। उसने घायलों को पीजीआई में दाखिल कराया।
सदर थाने में आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया, जो बाद में कविता की मौत होने पर हत्या में बदल गया। तभी से जिला अदालत में केस की सुनवाई चल रही थी। पीड़ित पक्ष के वकील पीयूष गक्खड़ ने बताया कि 3 जनवरी को अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया था, जिनको वीरवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोषी सुनील पर एक लाख रुपये, हरीश पर 90 हजार और बलवान, उसकी पत्नी ब्रह्मी देवी, विपिन व विपिन पर 80-80 हजार रुपये जुर्माना किया गया।
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रवींद्र के पेट पर अब भी चाकू के निशान... इनकी गवाही अहम साबित हुई
पीड़ित पक्ष के वकील ने अदालत में बहस के दौरान अदालत को सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। अदालत को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि घायल गवाह के बयान काफी अहम होते हैं। सांघी के कविता हत्याकांड में कविता का भाई रवींद्र भी वारदात में घायल था। उसके पेट पर अब भी चाकू के निशान हैं। ऐसे उसकी गवाही भी अहम साबित हुई।
दोषियों ने बूढ़े माता-पिता का हवाला देकर मांगा रहम
सुबह अदालत में दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। दोषियों ने अदालत से कहा कि वे गरीब परिवार से हैं। उनके माता-पिता बुजुर्ग हैं। ऐसे में उनको सजा देते समय रहम किया जाए। अदालत ने तथ्यों को ध्यान में रखकर सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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