फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rohtak News: पेरिस छोड़ भारतीय रंग में रंगीं नृत्यांगना पेरिन

विज्ञापन
30-रोहतक में सुपवा के सारंग महोत्सव में नृत्य प्रस्तुत करने पति पार्थ के साथ पहुंचीं पेरिन। अमर
विज्ञापन
विकास सैनी
विज्ञापन

रोहतक। नृत्य मेरा जीवन है। क्लासिकल नृत्य की गहराई जानना चाहती हूं, इसीलिए अपना परिवार, घर, स्वच्छ पर्यावरण सब छोड़कर भारत आई हूं। प्रदूषण के कारण यहां रहने में शुरू में दिक्कत हुई मगर कहते हैं कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी पड़ता है।
यहां आठ साल से नृत्य सीख रही हूं। अपने बेहतर भविष्य के लिए इस क्षेत्र में संर्घषरत हूं। नृत्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनानी है। यह कहना है फ्रांस की राजधानी पेरिस से आकर दिल्ली में बसी पेरिन का। देवताओं के सामने किया जाने वाला असम का लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्य सत्रिया प्रस्तुत करने पति पार्थ हजारिका के साथ सुपवा के सारंग कार्यक्रम में पहुंचीं नृत्यांगना पेरिन ने अमर उजाला से खास बातचीत की।
विज्ञापन

पेरिन ने कहा कि वीरवार को मंच पर सत्रिया की प्रस्तुति को सभी ने सराहा। इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी है। पहला समझौता पर्यावरण से करना पड़ा। पेरिस के मुकाबले यहां प्रदूषण अधिक है। इसके बावजूद यहां के वातावरण में रमी।
इसके साथ ही कला की बारीकियां सीखने के लिए लगातार घंटों अभ्यास किया। इसमें एक शब्द, भाव व मुद्रा को समझना काफी मुश्किल भरा रहा। इसे आसान बनाने के लिए हिंदी सीखी। सत्रिया को गहराई से समझने के लिए असम की संस्कृति को नजदीक से देखा।
पेरिस से पढ़ाई के बाद यहां नृत्य करते हुए नृत्य से जुड़े असम निवासी पार्थ से दिल्ली मुलाकात हुई थी और यहीं एक-दूसरे को जीवन साथी के रूप में चुन लिया। अब दोनों नृत्य कला को जी रहे हैं। नृत्य के लिए ही कुछ करना है। इसी में अपनी पहचान बनानी है, भविष्य संवारना है।
विज्ञापन

पार्थ ने बताया कि मंच पर पत्नी के साथ शास्त्रीय नृत्य में कृष्ण की लीलाओं का प्रदर्शन किया। यह देवताओं के सामने किया जाने वाला नृत्य है। इसे कहीं ओर नहीं किया जाता है। यह सिर्फ सुपवा के मंच पर किया है। इस क्षेत्र की चुनौतियां अलग हैं। चुनौतियां जीवन के हर क्षेत्र में हैं। इस क्षेत्र में हमेशा नया सीखना बरकरार रहता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें