43...बुटीक कार्य करती रजनी। संवाद
रोहतक। हुनर कभी भी आपके रोजगार का साधन बन सकता है। शहर की राजीव कॉलोनीवासी रजनी इसी वाक्य को चरितार्थ कर रही हैं। बसंतपुर की इस बेटी ने दसवीं की पढ़ाई के बाद पड़ोस में ही एक महिला से बुटीक कला सीखी जो शादी के बाद ससुराल में उनका स्वरोजगार बनी है। वह यहां शहर की पांच बेटियों को भी स्वावलंबी बना रही हैं। रजनी अब अपने स्वरोजगार से हर माह लगभग 40 हजार रुपये कमा रही हैं।
रजनी बताती हैं कि शादी पहले उन्होंने मायके में ही करीब 15 दिन बुटीक कला सीखी और घर में हाथ की मशीन पर अभ्यास करने लगी। फिर 2002 में उनकी शादी रोहतक निवासी ऑटो चालक सुनील कुमार से हो गई। समय के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ी तो रजनी ने बुटीक कला को स्वरोजगार बनाने की ठानी।
पति सुनील ने भी उनका सहयोग किया। रजनी बताती हैं कि उन्होंने 2004 में सुसराल में बुटीक कला से स्वरोजगार शुरू किया। उनकी पहले सूट से 20 रुपये आमदनी हुई। रजनी का बुटीक कार्य महिलाओं को पसंद आया तो उनके पास ऑर्डर भी अधिक आने लगे। वह अब दुर्गा शक्ति स्वयं सहायता समूह से भी जुड़ी हैं और आसपास की पांच बेटियों को भी यहां काम दिया है। उनका कहना है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं, बशर्ते उनको परिवार का सहयोग मिलता रहे।