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लालडोरा प्रॉपर्टी स्वामित्व योजना : 30 दिन बाद कोई केस फाइनल नहीं, जिम्मेदारी से भाग रहे अधिकारी

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रोहतक। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना लालडोरा प्रॉपर्टी स्वामित्व सिरे नहीं चढ़ पा रही है। नगर निगम ने एक माह पहले 19 हजार प्रॉपर्टी सार्वजनिक की थीं, लेकिन अभी तक एक केस भी फाइनल नहीं किया है। अधिकारी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
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नगर निगम के रिकाॅर्ड के मुताबिक शहर में दरवाजा मोहल्ला, बाबरा मोहल्ला, डेयरी मोहल्ला, धोबी मोहल्ला, प्रधाना मोहल्ला, बोहर, बलियाना, कन्हेली, खेड़ी साध, माजरा, पहरावर, ब्राह्मणामंडी, कलालान मोहल्ला, केवल गंज, पाड़ा मोहल्ला, पारस मोहल्ला, पिथवाड़ा मोहल्ला, प्रताप मोहल्ला, डिबडी मोहल्ला, सुनारिया कलां, सुनारिया खुर्द, कायस्थान मोहल्ला, सलारा मोहल्ला, किला मोहल्ला व गढ़ी बोहर में लालडोरा क्षेत्र है, यहां 19 हजार के करीब प्रॉपर्टी हैं। नगर निगम की तरफ से 6 नवंबर को वेबसाइट पर सार्वजनिक की थीं। एक माह में आपत्ति व सुझाव मांगे थे।
कमेटी गठित, किसी आवेदन पर नहीं हुआ काम
निगम आयुक्त ने लालडोरा प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कमेटी गठित की है, इसमें डीएमसी, जेडटीओ व दूसरे अधिकारी शामिल हैं। कमेटी को मौके पर जाकर रिपोर्ट तैयार करनी है। निगम के पास लगातार आवेदन आ रहे हैं, लेकिन सभी को अभी ठंडे बस्ते में रखा जा रहा है।
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जिम्मेदारी से बच रहे अधिकारी
विधानसभा चुनाव से पहले 11 जुलाई को मुख्यमंत्री नायब सैनी ने लाल डोरे को लेकर प्रदेशस्तर पर स्वामित्व प्रमाण पत्र योजना लागू की थी। रोहतक में तत्कालीन राज्यसभा सदस्य व मौजूदा कैबिनेट मंत्री कृष्णलाल पंवार ने 100 लोगों को जिला विकास भवन में स्वामित्व प्रमाण पत्र दिए थे। इसमें नगर निगम के 18 लोग शामिल थे। स्वामित्व प्रमाण पत्र पर संयुक्त आयुक्त के हस्ताक्षर थे। अब यह तय नहीं हो सका है कि कौन अधिकारी प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे।
100 लोगों को प्रमाण पत्र मिले, उनकी भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी
विधानसभा चुनाव से पहले जिले के करीब 100 लोगों को लालडोरे की प्रॉपर्टी के स्वामित्व के प्रमाण पत्र मिले थे। प्रमाण पत्र के बाद तहसील में रजिस्ट्री करवाई जानी थी, लेकिन अभी रजिस्ट्री शुरू नहीं हो सकी है। इसके लिए तहसील प्रशासन को सरकार की ओर से नोटिफिकेशन का इंतजार है।

लालडोरे की प्रॉपर्टी सार्वजनिक हुए एक माह हो गया है। पहले अधिकारियों की कमेटी को आवेदनों पर सुनवाई करनी थी, लेकिन अब पार्षद या पूर्व पार्षद की मौजूदगी में सुनवाई होगी। दूसरा, स्टाफ की भी कमी है। सोमवार को निगम आयुक्त से बात करेंगे।
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जितेंद्र कुमार, डीएमसी नगर निगम
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